हींग के फायदे- 5 Amazing Health Benefits of Asafoetida in Hindi ( हींग के फायदे )

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Benefits of Asafoetida 1

हींग के फायदे:- रसोई घर में मौजूद मसाले खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही कई तरह की समस्याओं से दूर रखने में भी मदद करते हैं। ऐसा ही एक मसाला हींग है, जिसके बारे में हम इस लेख में विस्तार से जानेंगे। हींग कई तरह के औषधीय गुणों से समृद्ध होती है, जो कई तरह के रोगों को दूर रखने के साथ-साथ उनके इलाज में भी सहायक साबित होती है। फिर भी इसे किसी रोग का सटीक इलाज समझना सही नहीं होगा।

हींग के फायदे

हम अपने इस लेख में हींग के औषधीय गुण और हींग खाने के फायदे की जानकारी दे रहे हैं . हींग से न सिर्फ सब्जी का स्वाद बेहतर होता है बल्कि स्वास्थ्य को भी फायदा पहुंचता है। क्या आपको पता है कि अनेक तरह की बीमारियों के इलाज में भी हींग के फायदे मिलते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, बवासीर, पेट के रोग, गैस, कब्ज, दर्द, पथरी की समस्या और डायबिटीज आदि में हींग के सेवन से लाभ मिलता है।

इतना ही नहीं, पेट में कीड़े होने पर, शरीर में गाँठ होने पर, पुराने जुकाम आदि में हींग के उपयोग से लाभ मिलता है। आइए जानते हैं कि आप किस-किस रोग में हींग से लाभ ले सकते हैं . इसकी जड़ गोंद तथा गन्धयुक्त होती है। इसके गोंद को मार्च से अगस्त के महीने में निकाला जाता है। शुद्ध हींग सफेद, स्फटिक के आकार का, 5 मि.मी. व्यास के गोल या चपटे टुकड़ों में होती है। हींग निकालने के लिए इसका चार वर्ष पुराना पौधा श्रेष्ठ माना जाता है। इसे पीस कर पाउडर बनाया जाता है। इसके अलावा, हींग के नुकसान किस तरह के हो सकते हैं, यह भी बताएंगे।

हींग क्या है

हींग की कई प्रजातियाँ होती हैं। हींग का पौधा 1.5-2.4 मीटर ऊँचा, सुंगधित होता है। यह कई वर्षों तक हरा-भरा रहता है। इसका तना कोमल होता है। तने में ढेर सारी डालियां होती हैं। इसके तने और जड़ में चीरा लगाकर राल या गोंद प्राप्त किया जाता है, जिसे हींग कहते है। हींग के तने और जड़ के कटे हुए भाग से रस निकलता रहता है। इसे जमा कर लिया जाता है। कुछ समय बाद इस भाग को थोड़ा और काट दिया जाता है। इससे निचले भाग से रस झड़ने लगता है। इसे भी जमा किया जाता है। पहली बार काटने के तीन महीने बाद, दूसरी बार चीरा लगाया जाता है।

 हींग के फायदे

अन्य भाषाओं में हींग के नाम ( Name of Hing in Different Languages )

1) Hindi – हींग

2) English (Hing In English) – तिब्बतन ऐसैफेटिडा (Tibetan assafoetida), Asafoetida (ऐसैफिटिडा)

3) Tamil (Hing/Asafoetida In Tamil) – पेरुगियम (Perungiyam), पेरुंगायम (Perungayam)

4) Sanskrit – सहस्रवेधि, जतुक, बाह्लीक, हिंगु, रामठ, हिंगुका

5) Urdu – हिंग (Hing), हींग (Heeng)

6) Kannada – हींग (Hing), हिंगु (Hingu)

7) Gujarati – वधारणी (Vadharani), हींग बधारणी (Hing badharani)

8) Telugu – इंगुर (Ingur), इंगुरा (Ingura)

9) Bengali – हिंगु (Hingu), हींग (Hing)

10) Punjabi पंजाबी – हिंगे (Hinge), हींग (Hing)

11) Marathi – हींग (Hing)

12) Malayalam – करिक्कयम (Karikkayam), कयम (Kayam), रुगायम (Rungayam)

13) Arabic – हल तीत् (Hal tith), हिलतुत (Hiltut)

14) Persian – अगेंजह (Angezah), अंगुजा (Anguza)

हींग के फायदे– Benefits of Hing in Hindi

1) एंटीऑक्सीडेंट के लिए ( Benefits of Hing for Antioxidant )

मधुमेह ऐसी समस्या है, जिससे पीड़ित व्यक्ति को अपने खान-पान का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। वहीं, मधुमेह की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के लिए हींग का सेवन किसी दवाई से कम नहीं होगा। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, हींग के अर्क में एंटीडायबिटिक एक्टिविटी पाए जाती है, जो मधुमेह से प्रभावित पैंक्रिअटिक बी सेल (अग्नाशय के कोशिकाओं) के खिलाफ प्रभाव डालती है। इसके अलावा, हींग रक्त शुगर को कम करने और सीरम इंसुलिन लेवल को बढ़ाने का काम कर सकती है। इससे मधुमेह की स्थिति में सुधार होता है ।

2) त्वचा के लिए (Benefits of Hing for Skin )

हींग का उपयोग त्वचा के लिए फायदेमंद साबित होता है। एक वैज्ञानिक रिसर्च में दिया हुआ है कि हींग में त्वचा को लाभ पहुंचाने वाले कई गुण पाए जाते हैं। इनमें फेरुलिक एसिड मुख्य होता है, जो एक तरह का एंटी ऑक्सीडेंट होता है। शोध में पाया गया है कि फेरुलिक एसिड चोट को ठीक करने वाली कोशिकाओं को सक्रिय करता है। साथ ही यह त्वचा को सूरज की यूवी किरणों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, त्वचा को जलन और डैमेज से भी छुटकारा दिलाता है ।

3) ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के लिए ( Benefits of Hing for Bronchitis and asthma )

ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसे श्वसन की समस्या से छुटकारा दिलाने में भी हींग के फायदे होते हैं। इन दोनों समस्याओं के उत्पन्न होने का मुख्य कारण श्वसन नली में सूजन का होना हो सकता है। इसे दूर करने के लिए एंटी- इंफ्लेमेटरी गतिविधि मदद करता है। वहीं, हींग में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं, जिस कारण यह ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी समस्या को ठीक करता है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि हींग खाने के फायदे ब्रोंकाइटिस और अस्थमा से राहत दिलाता है .

4) काली खांसी के लिए ( Benefits of Hing for Hooping cough )

जिन लोगों को खांसी की अधिक समस्या होती है, वो हींग का उपयोग करके खांसी से राहत पा सकते हैं। एक मेडिकल स्टडी के मुताबिक, हींग के औषधीय गुण के कारण काली खांसी के इलाज में इसका इस्तेमाल वर्षों से किया जा रहा है। फिलहाल, इस बात का अभी तक सही तरह से पता नहीं चल पाया है कि हींग के कौन-से गुण इस इलाज में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसलिए, इसकी पुष्टि के लिए कई वैज्ञानिक शोध किए जा रहे हैं .

5) कान दर्द के लिए (Benefits of Hing for Ear ache )

1) हींग, तुम्बरु तथा सोंठ के काढ़ा बना लें। इसे सरसों के तेल में पका लें। इसे 1-2 बूंद की मात्रा में कान में डालें। इससे कानदर्द, कान में सनसनाहट तथा कान में घाव आदि में लाभ होता है।

2) स्वर्जिका क्षार, सूखी मूली, हींग, काली मिर्च, सोंठ तथा शतपुष्पा के काढ़ा को तेल को पका लें। इसे 1-2 बूंद की मात्रा में कान में डालें। इससे कान में सनसनाहट, बहरापन तथा कान बहने आदि रोगों में लाभ होता है।

3) हिंग्वादि तेल को 1-2 बूंद कान में डालने से कर्णशूल (कान के दर्द) ठीक होता है।

4) हींग को पानी में घिसकर गुनगुना करके 1-2 बूंद कान में डालने से कान के रोग ठीक होते हैं।

हींग का इस्तेमाल कैसे करें

कैसे करें सेवन :

1) हींग को गुनगुने पानी में मिलकर सेवन कर सकते हैं।

2) सब्जी बनाते समय इस्तेमाल किया जा सकता है।

3) दाल में तड़का लगाने के लिए हींग का इस्तेमाल किया जा सकता है।

4) हींग को गुड़ के साथ मिलकर खाया जा सकता है।

5) हींग को शहद और अदरक के रस में मिलकर सेवन किया जा सकता है।

कब करें सेवन :

1) हींग को पानी में मिलकर सुबह सेवन किया जा सकता है।

2) हींग को दाल और सब्जी के तड़के में इस्तेमाल कर दोपहर और रात के भोजन में खाया जा सकता है।

3) गुड़ के साथ मिलाकर रात को भोजन के बाद इसका सेवन कर सकते हैं।

कितना सेवन करें :

1) हींग को हमेशा कम मात्रा में लेना चाहिए, लेकिन इसकी निश्चित सीमित मात्रा के संबंध के संबंध में अभी कोई शोध उपलब्ध नहीं है। इसलिए, हींग के सेवन की उचित मात्रा जानने के लिए आहार विशेषज्ञ की सलाह लें।

Side Effects of Asafoetida in Hindi

  • इसकी अधिक मात्रा मुंह में सूजन का कारण बन सकती है।
  • इससे पेट संबंधी कुछ समस्या उत्पन्न हो सकता है, जिनमें पेट फूलना और दस्त शामिल है।
  • हींग को अधिक मात्रा में उपयोग करने से सिरदर्द भी हो सकता है।
  • हींग को गर्भावस्था के दौरान न लेने की सलाह दी जाती है।

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हींग क्या है?

हींग की कई प्रजातियाँ होती हैं। हींग का पौधा 1.5-2.4 मीटर ऊँचा, सुंगधित होता है। यह कई वर्षों तक हरा-भरा रहता है। इसका तना कोमल होता है। तने में ढेर सारी डालियां होती हैं। इसके तने और जड़ में चीरा लगाकर राल या गोंद प्राप्त किया जाता है, जिसे हींग कहते है। हींग के तने और जड़ के कटे हुए भाग से रस निकलता रहता है। इसे जमा कर लिया जाता है। कुछ समय बाद इस भाग को थोड़ा और काट दिया जाता है। इससे निचले भाग से रस झड़ने लगता है। इसे भी जमा किया जाता है। पहली बार काटने के तीन महीने बाद, दूसरी बार चीरा लगाया जाता है।

त्वचा के लिए हींग कैसे उपयोगी है?

हींग का उपयोग त्वचा के लिए फायदेमंद साबित होता है। एक वैज्ञानिक रिसर्च में दिया हुआ है कि हींग में त्वचा को लाभ पहुंचाने वाले कई गुण पाए जाते हैं। इनमें फेरुलिक एसिड मुख्य होता है, जो एक तरह का एंटी ऑक्सीडेंट होता है। शोध में पाया गया है कि फेरुलिक एसिड चोट को ठीक करने वाली कोशिकाओं को सक्रिय करता है। साथ ही यह त्वचा को सूरज की यूवी किरणों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, त्वचा को जलन और डैमेज से भी छुटकारा दिलाता है ।

हींग से होने वाले Side Effects बताईये?

इसकी अधिक मात्रा मुंह में सूजन का कारण बन सकती है।
इससे पेट संबंधी कुछ समस्या उत्पन्न हो सकता है, जिनमें पेट फूलना और दस्त शामिल है।
हींग को अधिक मात्रा में उपयोग करने से सिरदर्द भी हो सकता है।
हींग को गर्भावस्था के दौरान न लेने की सलाह दी जाती है।