Amazing Health Benefits of Basil in Hindi, तुलसी के फायदे

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Benefits of Basil

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Benefits of Basil in Hindi। तुलसी के फायदे

भारत में तुलसी को जड़ी बूटियों की रानी और जीवन का अमृत कहा जाता है। तुलसी का इस्तेमाल कई चीजों में किया जाता है । तुलसी का सेवन करने से आप खांसी, जुखाम, त्वचा और कई समस्याओं से संबंधित कई समस्याओं से छुटकारा पा सकते है। तुलसी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी गुणकारी होते हैं ।आज हम आपको हमारे इसलिए के माध्यम से तुलसी से pl सभी आवश्यक जानकारी तुलसी क्या होती है, तुलसी के फायदे, तुलसी के नुकसान, तुलसी के पोषक तत्व आदि पर चर्चा परिचर्चा करेंगे।

Basil in Hindi

तुलसी का वैज्ञानिक नाम आसीमम सेक्टम है । यह लेमियेशी कुल की है।तुलसी एक द्विबीजपत्री और शाकीय औषधीय पौधा होती है। तुलसी का पौधा झाड़ीनुमा होता है।तुलसी का पौधा 2 से 3 फीट ऊंची होता है। तुलसी का पौधा सामान्य रूप से 2 या 3 वर्षों तक रहता है। तुलसी के पुष्प बनी और गुलाबी आभा में बहुत ही छोटे हृदय कार रूप में होती है। तुलसी का पौधा प्रमुख रूप से वर्षा ऋतु में उगते हैं । तुलसी की दो प्रजातियां होती है पहली होती है श्री तुलसी दिन की पत्तियां हरी होती है तथा दूसरी होती है, कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियां नीला कुछ बैंगनी रंग की होती है। हिंदू धर्म में तुलसी की पूजा की जाती है और इसे पवित्र माना जाता है। लोग अपने घरों और आंगन या दरवाजे या फिर बाग में तुलसी के पौधे लगाते हैं।

तुलसी का उत्पादन भारत मध्य अफ्रीका से लेकर दक्षिण पूर्वी एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में किया जाता है। तुलसी प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक होती है। तुलसी का इस्तेमाल होम्योपैथी एलोपैथी और यूनानी दवाइयों को बनाने में किया जाता है।तुलसी के पौधे में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो सर्दी, जुखाम, बुखार आदि समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होते हैं।

Benefits of Basil in Hindi

Basil in Hindi

खांसी के लिए (Basil in Hindi for cough)

खांसी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप तुलसी के सिरप का इस्तेमाल कर सकते हैं ।आप तुलसी का सिरप बाजार से खरीद सकते हैं या फिर घर पर भी बना सकते हैं। तुलसी के पत्तों और 5 लॉन्ग को एक कप पानी में डालकर 10 मिनट तक उबालकर उसमें कुछ नमक मिलाकर ठंडा होने के पश्चात सेवन करने से आप खासी की समस्या से निजात पा सकते हैं।तुलसी के पत्तों के साथ उबले हुए पानी से गरारे करने से गले की खराश से भी छुटकारा पाया जा सकता है। तुलसी का सेवन करने से आप ब्रिटिश और दमा जैसी अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा पा सकते हैं ।

सर्दी जुखाम के लिए (Basil in Hindi for cough and cold)

सर्दी जुखाम की समस्या से छुटकारा पानी के लिए आप तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल कर सकती है ।सर्दी जुकाम से राहत पाने के लिए आप तुलसी के ताजे पत्ते का सेवन कर  सकते हैं । वर्षा ऋतु में डेंगू और मलेरिया के बुखार का खतरा बढ़ जाता है ।ऐसे में आप उबले हुए पानी के साथ तुलसी की पत्तियों का सेवन करें इससे आप बुखार संबंधित समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं ।इसके अतिरिक्त, आप तुलसी अदरक काली मिर्च की दूध वाली चाय का सेवन भी कर सकते हैं।

तनाव को दूर करने के लिए (Basil in Hindi to reduce stress)

तुलसी के पत्तों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो तनाव को कम करने में सहायक होते हैं। तो उसे हमारे शरीर के अंगों में रसायनिक तनाव के खिलाफ रक्षा करने में सहायक होती है। तुलसी के 10 से 12 पत्तों का दिन में 2 बार सेवन करने से आप तना संबंधित समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। तुलसी के पत्तों का नियमित रूप से सेवन करने से रक्त भी शद्ध होता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए (Basil in Hindi for immune system)

नियमित रूप से ताजा तुलसी के पत्तों का सेवन करने से हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है ।तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। अस्थमा ब्रोकेटिस और फेफड़ों के संक्रमण का इलाज करने हेतु आप तुलसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। तुलसी में संक्रमण से लड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के एंटीबॉडी का उत्पादन बढ़ाने में सहायक होती है। आप सूखी तुलसी के पत्तों की जगह ताजा तुलसी का उपयोग कर सकते हैं ।

आंखों के लिए (Basil in Hindi for eyes)

तुलसी में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। विटामिन ए में  एंटीऑक्सीडेंट औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जो हमारी आंखों के लिए काफी फायदेमंद होते हैं ।ताजा तुलसी के रस को आंखों की सूजन को कम करने और रतौंधी (रात के समय दिखाई ना देने) की समस्या का इलाज करने में इस्तेमाल किया जाता है। प्रतिदिन रात को सोने से पहले काली तुलसी के रस की दो बूंद आंखों में डालने से आप इन सभी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।

मौखिक स्वास्थ्य के लिए (Basil in Hindi for oral health)

तुलसी का सेवन करने से बुरी सास, पायरिया और अन्य मसूड़ों की संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है ।तुलसी का सेवन करने से हमारे मसूड़े मजबूत बनती है ।तुलसी ने पारा के कुछ घटक पाए जाते हैं जो जंतु नाशक के रूप में कार्य करते हैं ।यह हमारे मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायक होते हैं। आप सरसों के तेल के साथ तुलसी पाउडर को मिलाकर टूथपेस्ट भी बना सकते हैं । बुरी सांसों की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप इसका इस्तेमाल पर मालिश करने के लिए भी कर सकते हैं।

चेहरे के लिए (Basil in Hindi for skin)

तुलसी का सेवन करने से ही मुहासों और मुहांसों के घाव को रोका जा सकता है। ताजी तुलसी के पत्तों के रस को चेहरे पर लगाने से बैक्टीरिया को हटाया जा सकता है, जो त्वचा के रोम छिद्र को बंद होने और मुहांसों के प्रमुख कारण होते हैं। जीवाणुओं को नष्ट करने हेतु आप तुलसी के रस को प्रभावित त्वचा पर लगाए ।आप तुलसी के रस को त्वचा की सूजन कम करने और जलन को कम करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। तुलसी का इस्तेमाल करने से दाद, सियरोसिस और कीट के काटने जैसे अन्य त्वचा संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा पाया जा सकता है। तुलसी के रस का इस्तेमाल करने से त्वचा नर्म कोमल और स्वस्थ होती है।

सिर दर्द के लिए (Basil in Hindi for headache)

तुलसी की चाय का सेवन करने से सिर दर्द जैसी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है, क्योंकि यह मांसपेशियों को आराम देने में सहायक होती है । तुलसी और चंदन का पेस्ट बनाकर माथे पर लगाने से तुरंत तनाव और तंग मांसपेशियों की कारण होने वाले सर दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके अलावा आप तुलसी के पत्तों को चबा सकते हैं या फिर शुद्ध तुलसी के तेल से अपने सिर पर मालिश कर सकते हैं।

त्वचा के लिए (Basil in Hindi for skin)

तुलसी में एंटीबायोटिक औषधीय गुण पाया जाता है, जो संक्रमण संबंधित समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है। तुलसी के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल औषधीय गुण पाया जाता है, जो बैक्टीरिया के संक्रमण और विकास को बढ़ने से रोकता है ।तिल के तेल के साथ ढाई सौ ग्राम तुलसी के पत्तों को बराबर मात्रा में पीसकर उबाल लें और इसे अपने त्वचा पर लगा लें ।ऐसा करने से खुजली जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। तुलसी के पत्तों को नींबू के रस के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर लगाने से ताकि समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आप तुलसी के पत्तों को बेसन के साथ मिलाकर त्वचा को साफ किया जा सकता है।

पेट दर्द के लिए (basil in Hindi for stomach ache)

तुलसी के पत्तों में दर्द निवारक औषधीय गुण पाया जाता है, जो पेट दर्द, सिर दर्द तथा अन्य समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है ।तुलसी के पत्तों का रस निकालकर पीने से पेट दर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है ।तुलसी के रस में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द से तुरंत आराम पाया जा सकता है। तुलसी की चाय का सेवन करने से कब्ज, बवासीर और मासिक धर्म के कारण होने वाले दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।

कैंसर के लिए (Basil in Hindi for cancer)

तुलसी के पत्तों में फाइटोकेमिकल पाए जाते हैं जो प्राकृतिक रूप से त्वचा कैंसर लीवर के कैंसर और मौखिक कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के विकास को रोकने में सहायक होते हैं। तुलसी का सेवन करने से एंटी ऑक्सीडेंट गतिविधियां बढ़ती है और ट्यूमर कैंसर फैलने से रोका जा सकता है।

पथरी के लिए

पैसे का सेवन करने से गुर्दे की कार्यप्रणाली मजबूत होती है ।तुलसी एक डिटॉक्सिफायर और हल्के मूत्र होने की वजह से यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में सहायक होती है। तुलसी का सेवन करने से पुत्र की बढ़ती आवृत्ति के माध्यम से गुर्दे को साफ करने में सहायक होते हैं। तुलसी का सेवन करने से गुर्दे के समग्र कार्य में सुधार लाने खाली पेट पानी के साथ 5-6 तुलसी के पत्तों का सेवन करें। तुलसी के ताजे रस को शहद में मिलाकर सेवन करने से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।

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Side effects of Basil in Hindi

▶️ तुलसी रक्त को पतला करने में सहायक होती है। तुलसी का  खून की जमने को रोकने वाली दवाइयों के साथ सेवन नहीं किया जा सकता है।

▶️ डायबिटीज मधुमेह है या हाइपोग्लाइसीमिया से पीड़ित लोगों को तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए, यदि वह दवाइयों का सेवन कर रहे हैं। क्योंकि तुलसी का सेवन करने से रक्त शर्करा अत्यधिक मात्रा में कम हो सकती है।

▶️ गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अत्यधिक मात्रा में तुलसी का सेवन करने से गर्भाशय संकुचन और मासिक धर्म की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी तुलसी का सेवन करने से बचना                  चाहिए। गर्भावस्था के दौरान तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए।

▶️ तुलसी की चाय का अधिक मात्रा में सेवन करने से सीने में जलन एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

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