Top 10 Health Benefits of White Rice and Brown Rice in Hindi ( चावल के फायदे )

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Benefits of Brown Rice


हमारे रोज के खान पान का चावल अहम हिस्सा है. चावल के बिना खाने की कल्पना मुश्किल है. ये एक हल्का आहार है पर इसे खाने के बाद काफी देर तक फिर भूख नहीं लगती. अक्सर जिन लोगों को डाइटिंग करनी होती है, चावल से दूरी बना लेते हैं. क्या आपको पता है कि चावल में विभिन्न प्रकार के विटामिन और मिनरल्स पाए ( benefits of brown rice ) जाते हैं. इसमें नियासिन, विटामिन डी, कैल्श‍ियम, फाइबर, आयरन, थायमीन और राइबोफ्लेविन पर्याप्त मात्रा में होता है. ये तत्व हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं. भारतीय परिवारों में राज्य के हिसाब से खान-पान बदलता रहता है। जैसे, पंजाब में सरसों की भाजी और मक्के की रोटी फेमस है, गुजरात में ढोकला, फाफड़ा आदि फेमस हैं।

वहीं एमपी में गेहूं से बने फूड काफी फेमस हैं। लेकिन इन सभी के बीच चावल (Rice) ऐसा आहार है, जो पूरे भारत में खूब खाया जाता है। चावल का वैज्ञानिक नाम ओरिजा सैटिवा है, यह दुनिया के सबसे पुराने अनाज में से एक है। चावल की पैदावार पिछले करीब 5 हजार साल से हो रही है। इसका प्रयोग मुख्य भोजन के रूप में किया ( benefits of brown rice ) जाता है। दुनिया का 90% चावल एशिया से आता है। इसकी कई किस्में होती हैं लेकिन मुख्य रूप से इसे दो समूह में बांटा गया है। पहला सफेद चावल और दूसरा ब्राउन राइस आमतौर हमारे भोजन में अनिवार्य रूप से शामिल रहने वाला अनाज है,चावल। कुछ लोग इसे हल्का भोजन बताते हैं, तो कुछ लोग इसे मोटापा बढ़ाने वाला भोजन करार देते हैं।

वास्तव में हर भोज्य पदार्थ की तरह चावल के भी कुछ फायदे और नुकसान होते हैं, जो अत्यधि‍क सेवन के परिणाम स्वरूप देखने को मिलते हैं। हममें से ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि चावल केवल पेट भरने के लिए ही खाया जाता है. स्वास्थ्य के लिहाज से ये कुछ खास फायदेमंद नहीं है. कई लोग तो ये सोचकर भी चावल खाने से पर‍हेज ( benefits of brown rice ) करते हैं कि चावल खाने से उनका पेट बाहर आ जाएगा. भारतीय खाने का एक प्रमुख तत्व होने के बावजूद चावल के स्वास्थ्यवर्धक फायदे अनदेखे ही हैं. हमारे घरों में चावल बनता तो हर रोज है लेकिन केवल इसलिए कि ये आहार का हिस्सा है. कम ही लोग होते हैं जो बतौर हेल्दी फूड इसे बनाना और खाना पसंद करते हैं. पर आपको ये जानकर हैरत होगी कि जिस आहार को बाकी की तुलना में इतना कम आंका जाता है उसके ढेरों फायदे हैं. चावल एक ऐसा भोजन है, जिसे दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक के लोग खाते हैं।

शायद ही ऐसा कोई हो जो कम से कम एक समय भी चावल न खाता हो। दिल्ली का राजमा-चावल हो या फिर हैदराबाद की चिकन बिरयानी। दोनों में चावल का अहम रोल है, जिसके ( benefits of brown rice ) कारण ये लोगों के पसंदीदा खानों में से एक है। वैसे तो चावल को हम पकाकर खाते हैं, ताकि ये हमें नुकसान न दें और हमारा पेट भर सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चावल के कई ऐसे फायदे हैं जो हमें इसके सेवन से मिल सकते हैं। शायद नही, तो चलिए आपको सफेद चावल खाने के इन फायदों के बारे में बताते हैं। शायद ही कोई ऐसा होगा जो चावल न खाता हो। पूरे दक्षिण भारत, बिहार, बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, असम आदि प्रदेशों का मुख्य भोजन चावल ही है।

भारत में प्राचीन काल से ही भोजन के रूप में चावल का सेवन किया जा रहा है। चावल को पकाकर तो खाया ही जाता है, साथ ही इससे अनेक प्रकार के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। क्या आपको पता है कि चावल एक अनाज के साथ-साथ एक उत्तम औषधि भी है, और चावल के सेवन से ढेर सारे फायदे होते हैं। क्या आपको यह पता है कि सफेद ( benefits of brown rice ) चावल से ब्राउन राइस अधिक फायेदमंद होता है। आयुर्वेदिक के अनुसार, चावल में तत्काल उर्जा प्राप्त करने, ब्लड शुगर को स्थिर करने और बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने की क्षमता होती है।

चावल के इस्तेमाल से पीलिया, बवासीर, उल्टी और दस्त सहित अनेक रोगों का इलाज किया जाता है। आइए जानते हैं कि आप रोगों में कैसे चावल के फायदे ले सकते हैं। क्या आप भी चावल खाना चाहते हैं, लेकिन बढ़ते वजन के डर से नहीं खा पाते? अगर ऐसा है, तो आपकी समस्या का हल इस लेख में है और उसका नाम है – ब्राउन राइस। ब्राउन राइस न सिर्फ आपके आहार में चावल की ( benefits of brown rice ) कमी को पूरा करेगा, बल्कि आपको वजन कम करने में भी मदद करेगा। इसके अलावा भी ब्राउन राइस के फायदे कई हैं, जिनके बारे में हम दादी के नुस्खे के इस लेख में बात करेंगे। साथ ही हम यह भी जानेंगे कि ब्राउन राइस कैसे बनता है।

चावल क्या है?

चावल एक प्रकार का अनाज है। धान के बीजों को चावल कहते हैं। यह सीधा, छोटा, घास की प्रजाति का पौधा होता है। इसका तना 60-120 सेमी लम्बा, रेशेदार जड़ वाला, पत्तेदार, गोल एवं पीले रंग का होता है। इसके पत्ते सीधे, 30-60 सेमी लम्बे एवं 6-8 मिमी चौड़े अथवा अत्यधिक चपटे, रेखित तथा खुरदरे होते हैं। इसके फूल 8-12 मिमी लम्बे ( benefits of brown rice ) गुच्छों में होते हैं। इसकी बाली 7.5-12.5 सेमी लम्बी, एकल या 2-7 के गुच्छों में प्रायः नीचे की ओर झुकी हुई, हरी तथा पकने पर चमकीली सुनहली पीली होती है। घास जैसा हरा अथवा पके हुए धूसर रंग के फल को ही धान कहते हैं। इसी धान से चावल निकालते हैं। इनके दाने सफेद रंग के होते हैं, जिन्हें चावल कहते हैं।

भारत में अधिकांश स्थानों पर वर्ष में एक बार, तथा कुछ स्थानों पर धान की फसल वर्ष में दो या तीन बार भी ली जाती है। चावल के अलावा धान के और भी कई उत्पाद हैं जैसे, चूड़ा या पोहा, लावा आदि। ब्राउन राइस को भूरा चावल (Brown rice) भी कहा जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी. मैंगनीज, फास्फोरस, ( benefits of brown rice ) आयरन, फाइबर, फैटी एसिड आदि सफेद चावल की तुलना में दोगुने मात्रा में होते हैं। धान के पौधे की आयु तीन से चार महीने की होती है। यहां चावल या ब्राउन राइस से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों में लिखा गया है ताकि आप चावल से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।

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अन्य भाषाओं में चावल के नाम ( Name of Rice in Different Languages )

Rice in –

1) Hindi – चावल, धान

2) English – Rice (राइस), एशियन राइस (Asian rice), वाइल्ड राइस (Wild rice), पैडी (Paddy)

3) Sanskrit – शालिधान्यम्, व्रीहि, तण्डुल, षष्टिक

4) Oriya – चाउल (Chaul), धान (Dhan)

5) Kannada – भट्टा (Bhatta)

6) Gujarati – भात (Bhat), चोखा (Chokha)

7) Tamil – अरशी (Arishi), नेल्लु (Nellu)

8) Telugu – धान्यमु (Dhanyamu), वडलु (Vudlu)

9) Bengali – धान (Dhan), चांवोल (Chanvol)

10) Nepali – धान (Dhan)

11) Punjabi – धाम (Dham), मुंजी (Munji), ताइ (Tai)

12) Marathi – तांदूल (Tandula), भात (Bhat) Malayalam – अरी (Ari), नेल्लु (Nellu)

13) Arabic – अर्रूज (Arruz), अर्ज (Arz)

14) Persian – बिरांज (Biranj)

चावल का औषधीय गुण (Medicinal Properties of Rice in Hindi)

1) शालि चावल पचने पर मधुर, पेट को ठण्डा करता है। यह फाइवरयुक्त, तैलीय, जल्द पचने वाला और वात तथा कफ को बढ़ाने वाला ( benefits of brown rice ) होता है। यह पित को शान्त करता है। यह शरीर को बल देता है और मेद तथा माँस की वृद्धि करता है। यह वीर्य को पुष्ट करता है। यह मल को बान्धता है और पेशाब को बढ़ाता है। यह गले की आवाज को ठीक करता है।

2) लाल शालि चावल सभी शालि धान्यों में श्रेष्ठ तथा वात पित और कफ तीनों दोषों को शान्त ( benefits of brown rice ) करने वाला होता है। उपरोक्त गुणों के अलावा यह भूख बढ़ाता है। हृदय को प्रसन्न करता है। यह आँखों के लिए लाभकारी है। यह बुखार और बुखार के कारण लगने वाली प्यास को समाप्त करता है। यह दम फुलना, खाँसी और जलन को समाप्त करता है। इसकी जड़ में भी लगभग यही गुण होते हैं।

चावल के फायदे ( Benefits of Rice in Hindi )

1) बुखार में चावल के फायदे ( Benefits of Rice for fever )

बुखार होते ही लोग चावल का सेवन बंद कर देते हैं, लेकिन यदि हम शालि चावल का प्रयोग करें तो यह बुखार को दूर करने में भी ( benefits of brown rice ) लाभकारी होता है। गोक्षुर तथा छोटी कटेरी के काढ़े से लाल शालि-चावल की पेय बनाकर सेवन करें। इससे बुखार के कारण उत्पन्न होने वाली पसलियों के दर्द, पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द तथा सरदर्द की समस्या आदि में लाभ होता है।

जलन, उल्टी तथा अत्यधिक प्यास से पीड़ित रोगी को धान के लावे के सत्तू में शक्कर तथा मधु मिलाकर सेवन कराने से लाभ होता है। पुराने शालि चावल तथा साठी चावल से बनाए गए दलिया तथा भात आदि का सेवन बुखार में फायदेमंद होता है।

2) मूत्र रोग के लिए ( Benefits of Rice urinary disease )

पेशाब में होने वाली जलन तथा पेशाब में दर्द आदि की समस्याओं में चावल काफी फायदेमंद ( benefits of brown rice ) हैं। शतावर, काश, कुश, गोखरू, विदारीकन्द, शालिधान (शालिचावल), ईख तथा कसेरू को बराबर मात्रा में लें। इसे चार गुने पानी में रात भर भिगो दें। इस पानी की 20-40 मिली हिम, मधु एवं शर्करा मिलाकर सेवन करें। इससे पित के कारण पेशाब में होने वाली परेशानियों में लाभ होता है।

3) पाचन के लिए ( Benefits of Rice for digestion )

विशेषज्ञ भोजन की विषाक्तता, दस्त और यहां तक कि अपच जैसी पाचन संबंधी बीमारियों को शांत करने के लिए चावल का पानी पीने की सलाह देते हैं. कंसल्टेंट न्यूट्रिशनिस्ट रूपाली दत्ता कहती हैं, ” कांजी एक पारंपरिक पेय है, जो हमेशा के लिए बन गया है बच्चों को लगातार दस्त होने पर अस्वस्थ होने पर कांजी पानी दिया जा सकता है चावल के पानी में विटामिन ( benefits of brown rice ) और खनिज जो हमारे पेट के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक प्रीबायोटिक्स की प्रचुरता को बनाएं रखता है.

4) बालों के लिए ( Benefits of Rice for Hair Growth )

दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में चावल के पानी का उपयोग बालों के लिए किया जाता है पारंपरिक रुप से चावल का पानी ( benefits of brown rice ) आज भी कई सौंदर्य समानों का हिस्सा है. विशेषज्ञों के अनुसार, चावल के पानी को बालों में लगाने से चमकदार और चिकने हो जाते हैं. साथ ही बालों को मजबूत करता है जो इन्हे लंबे समय तक बढ़ने में मदद करता है.

ब्राउन राइस में ऐसे कई गुण हैं, जो आपके बालों को स्वस्थ और सुंदर बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।

5) स्वस्थ और कोमल त्वचा के लिए ( Benefits of Rice for Skin )

पोषण विशेषज्ञ और विशेषज्ञ, सूखी त्वचा, खुले छिद्र और मुँहासे जैसी समस्याओं से निपटने के लिए चावल के पानी का उपयोग करने की सलाह देते हैं पोषण विशेषज्ञ शिल्पा अरोड़ा के पास स्वस्थ त्वचा के लिए इसे उपयोग में लाने का एक बहुत ही आसान तरीका है, चावल के पानी को आइस ट्रे में डालें और इसे फ्रीज करें. खीरा भी मिलाएं इन आइस क्यूब्स को टोनर के रूप में ( benefits of brown rice ) चेहरे पर लगाएं। ये आइस क्यूब्स बहुत ही पौष्टिक होते हैं. आपकी त्वचा के लिए इसमें पोषक तत्वों की पूरी मात्रा होती है यह रक्त को बढ़ाता है और कोलेजन को भी बढ़ाने का काम करता है. इसमें विटामिन ए, सी और के, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो आपकी त्वचा के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं. चावल का पानी त्वचा को चमकदार और हाइड्रेट रखता है.

6) हड्डियों के लिए ( Benefits of Rice for Strong Bons )

सूजन और जोड़ों के दर्द की समस्या से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए बाँस का चावल एक बेहतरीन उपाय है। दरअसल बाँस के चावल के अंदर फ्लेवोनोइड, एल्कलॉइड और पॉलीसेसेराइड, गुण होते हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट कहे जाते हैं। यह जोड़ों के दर्द, कमर दर्द में लाभ पंहुचाते हैं। ड्डियों को तंदुरुस्त रखने के लिए मैग्नीशियम ( benefits of brown rice ) बहुत फायदेमंद मिनरल है और यह ब्राउन राइस में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह बोन मिनरल डेंसिटी को बढ़ाने में मदद करता है।

7) पैरों की जलन और सूजन के लिए Benefits of Rice for burning and swelling )

चावल विशेषकर ब्राउन राइस में फेनोलिक यौगिक और एंटी-इंफ्लामैट्री गुण होते हैं, इसलिए यह त्‍वचा की जलन और लाली को भी दूर करने में मदद करते हैं।

1) शालि चावल के धुले हुए पाने से पैरों को धोने पर पैरों की जलन शांत होती है।

2) शालि चावल को पीसकर पैरों में लगाने से पैरों की सूजन तथा जलन मिट जाती है।

3) आग से जले हुए स्थान पर शालि चावल को पीसकर लेप करने से जलन शान्त होती है।

8) उल्टी रोकने के लिए Benefits of Rice for vomiting )

चावल का धान पेट के लिए काफी लाभकारी होता है। धान के लावा का सेवन करने से उल्टी बन्द होती है। धान के लावे से बने सत्तू् में मधु तथा घी मिलाकर सेवन ( benefits of brown rice) करने से उल्टी पर रोक लगती है। शालिधान के लावे की दलिया में मधु मिलाकर सेवन करने से उल्टी बन्द हो जाती है। धान का लावा, कपित्थ, मधु और पिप्पली की जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण (rice flour) बना लें। इस चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करने से सभी प्रकार की उल्टी तथा भूख न लगने की समस्या ठीक होती है।

राइस का उपयोग – How to Use Rice in Hindi

राइस के स्वास्थ लाभ जाने के बाद इसे बनाने की विधि जानना जरूरी है। नीचे दिए गए निर्देशों की मदद से आप स्वादिष्ट राइस बना सकते हैं।

राइस बनाने की विधि (4 लोगों के लिए)

सामग्री:

1) 250 ग्राम राइस

2) 500 मिली लीटर पानी

3) एक सॉस पैन

4) दो चम्मच घी

विधि:

1) सॉस पैन में पानी उबलने के लिए रख दें।

2) जब पानी अच्छी तरह से उबल जाए, तो उसमें राइस डाल दें और मध्यम आंच पर 30 मिनट के लिए पकाएं। ( benefits of brown rice ) अच्छी 3) तरह पक जाने पर आंच बंद कर दें और चावल को 10 से 15 मिनट के लिए ढक कर रख दें।

4) फिर चावल पर घी डालकर परोसें।

इसके अलावा, आप राइस से वेजिटेबल पुलाव व मुशरूम राइस आदि भी बना सकते हैं। आप इससे खीर भी बना सकते हैं।

Side Effects of Rice in Hindi

 जी मिचलाना, उल्टी, सिरदर्द और डायरिया ।

आर्सेनिक की मात्रा बढ़ जाने से स्किन, मूत्राशय और लंग कैंसर हो सकता है।

पथरी तथा मधुमेह के रोगियों को चावल नहीं खाना चाहिए।

हालांकि चावल खून में रक्तशर्करा यानी चीनी के स्तर को नियंत्रित करता है, लेकिन मधुमेह के रोगियों को चावल का सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए। उन्हें केवल लाल या भूरे चावल (brown rice) ही खाने चाहिए।

मधुमेह (डायबिटीज) रोगियों को सफेद चावल बिल्कुल भी नहीं खाने चाहिए।

चावल खाने से शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है, इसलिए यह मोटापे को नियंत्रित करने में सहयोगी होता है, लेकिन इसका अधिक सेवन करने से मोटापा बढ़ भी सकता है।

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