Top 5 Amazing Health Benefits of Sandalwood in Hindi ( चंदन के 5 फायदे )

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Benefits of Sandalwood Powder

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Benefits of Sandalwood Powder

सदियों से खूबसूरती को बनाए रखने के लिए चंदन का उपयोग हो रहा है। चंदन का पाउडर ही नहीं इसका तेल भी हमें खूबसूरत बनाता है। यहां जानिए चंदन से जुड़ी वो बातें जो आजतक आपने शायद सुनी भी ना हों। बिजी लाइफस्‍टाइल और पॉल्‍यूशन के चलते पिंपल, डार्क स्‍पॉट और डार्क सर्कल जैसी स्किन ( Benefits of Sandalwood Powder ) प्रोब्लम्स होना आम है. आमतौर पर ये समस्याएं 8 से 9 घंटे सोना, अधिक पानी पीना और हेल्‍दी डाइट लेने से दूर हो सकती है. हालांकि, इन समस्‍याओं से दूर रहने के लिए यही पर्याप्त नहीं है, कभी-कभी आपको कुछ बाहरी समाधानों का सहारा लेना पड़ सकता है. 

चंदन आयुर्वेद में एक उम्‍दा ब्‍यूटी इंग्रीडीयंट्स है, जो प्राकृतिक, भरोसेमंद और प्रभावी भी है. यह आमतौर पर भूरे रंग की डंडी होती है, जो जीनस सैंटलम पेड़ की सुगंधित लकड़ी से प्राप्त होता है. चंदन का तेल कई तरह की स्किन समस्‍याओं में आराम देता है. इसमें कई तरह के मेडिकल गुण होते हैं. चंदन पाउडर का इस्तेमाल न केवल चेहरे को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाता है ( Benefits of Sandalwood Powder ) बल्कि इसके इस्तेमाल से त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान भी हो जाता है। यूं तो चंदन पाउडर के फायदे लगभग सभी को पता होंगे पर इसके इस्तेमाल का सही तरीका कम ही लोगों को पता होता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता है। इसके अर्क के माध्यम से कई समस्याओं को दूर भी किया जा सकता है। बता दें कि ये आंखों की बीमारियों को दूर करने के साथ से तनाव को कम करने में भी बेहद सहायक है।

चंदन पाउडर का इस्तेमाल न केवल चेहरे को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाता है बल्कि इसके इस्तेमाल से त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान भी होता है. आपने चंदन के पेड़ को कभी देखा है? अगर नहीं देखा है, तो कभी ना कभी यह जरूर सुना होगा कि, चंदन नाम का एक पेड़ होता है, जो बहुत ही सुगंधित होता है। कई लोग चंदन की ( Benefits of Sandalwood Powder ) लकड़ियों का इस्तेमाल अपने घरों को सजाने के लिए करते हैं। चंदन की लकड़ियों से पूजा-पाठ के सामान जैसे- अगरबत्ती, हवन सामग्री आदि भी बनाएं जाते हैं। चंदन की लकड़ी महंगी होती है, इसलिए इसकी तस्करी भी की जाती है। असल में, लोगों को चंदन के पेड़ के बारे में केवल इतनी ही जानकारी होती है।

अधिकांश लोगों को यह पता ही नहीं है कि, चंदन एक बहुत ही फायदेमंद जड़ी-बूटी भी है, और चन्दन का प्रयोग बहुत सालों से चिकित्सा के लिए किया जा रहा है। भारत में चंदन को पवित्र माना जाता है। आपने इसका इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान चंदन तिलक के रूप में जरूर देखा होगा। वहीं, इसके गुणों की वजह से त्वचा के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। हालांकि, कई लोग होंगे जिन्हें त्वचा के ( Benefits of Sandalwood Powder ) अलावा चंदन के फायदे शायद ज्यादा पता न हों। ऐसे में, दादी के नुस्खे  के इस लेख में हम स्वास्थ्य के लिए चंदन के फायदे बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही चंदन के साइड इफेक्ट क्या हो सकते हैं, इस बारे में भी जानकारी दी जाएगी। चंदन के फायदे और इससे जुड़ी अन्य जानकारी के लिए जुड़े रहिये इस लेख से।आइए जानते हैं कि चंदन के उपयोग से आप किस-किस बीमारी में लाभ ले सकते हैं।

Notice Titleचंदन क्‍या है – What is Sandalwood in HindiNotice Title

चंदन एक जड़ी-बूटी है। सुगन्धित, तथा शीतल होने से यह लोगों को आनन्द प्रदान करता है, इसलिए इसे चन्दन कहते हैं। चंदन के वृक्ष हरे रंग के और 6 से 9 मीटर ऊंचे होते हैं। इसकी शाखाएं झुकी होती हैं। चंदन के पेड़ की छाल लाल , या भूरे, या फिर भूरे-काले रंग की होती है। चंदन के पत्ते अण्डाकार, मुलायम होते हैं, और पत्ते के आगे वाला भाग ( Benefits of Sandalwood Powder ) नुकीला होता है। चंदन के फूल भूरे-बैंगनी, या जामुनी रंग होते हैं, जो गंधहीन होते हैं। इसके फल गोलाकार, मांसल होते हैं, जो पकने पर शयामले, या बैंगनी रंग के हो जाते हैं।

इसके बीज कठोर, अण्डाकार अथवा गोलाकार होते हैं। चंदन के वृक्ष प्रायः 20 वर्ष के बाद ही बड़े होते हैं। पेड़ के भीतर का हिस्सा हल्का पीला रंग का, और सुगंधित होता है। पुराने वृक्षों की छाल दरार युक्त होती है। चंदन का वृक्ष 40-60 वर्ष की आयु के बाद उत्तम सुगन्ध वाला हो जाता है। चंदन के वृक्ष में फूल जून से सितम्बर के बीच होते हैं, और ( Benefits of Sandalwood Powder ) फल नवम्बर से फरवरी तक होते हैं। ऐसी अवस्था में चंदन पूरी तरह से उपयोग करने लायक हो जाता है। चंदन के पेड़ की कुछ विशेषताएं हैंः-

1) उड़ीसा में पैदा होने वाला चंदन सबसे उत्तम होता है।
2) भारत-यूनान (यवन देश) क्षेत्र में में पैदा होने वाला चंदन गुणवत्ता में थोड़ा कम होता है।
3) पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि स्थानों में होने वाला चंदन सबसे कम गुणवत्ता वाला बताया गया है।
4) गंध के हिसाब से उड़ीसा का चंदन सर्वोत्तम होता है।

Benefits of Sandalwood Powder

अन्य भाषाओं में चंदन के नाम (Name of Chandan in Different Languages)

Chandan in –

1) Hindi- चंदन, श्वेत चंदन, सफेद चंदन

2) Urdu- सन्दल सफेद (Sandal safed)

3) English- सैंनडल ट्री (Sandal tree), व्हाइट सैन्डल ट्री (White sandal tree), ट्रयू सेन्डल वुड (True sandal

4) Sanskrit- श्रीखण्ड, चन्दन, भद्रश्री, तेलपर्णिक, गन्धसार, मलयज, चन्द्रद्युति

5) Oriya- चन्दोनो (Chandono)

6) Kannada- श्रीगन्ध (Shrigandha)

7) Gujarati- सुखड़ (Sukhud)

8) Telugu- गंधपु चेकका (Gandhapu chekka), चन्दनामु (Chandnamu)

9) Tamil- चंदनं मरम (Chandanam maram), सन्दनम् (Sandanam), उलोसिडम (Ulosidam)

10) Bengali- चन्दन (Chandan)

11) Punjabi- चन्दन (Chandan)

12) Marathi- चन्दन (Chandan), गंधचकोडा (Gandhchakoda)

13) Malayalam- चन्दनम (Chandanam)।

14) Nepali- चंदन (Chandan)

15) Arabic- संदले सफेद (Sandle safed), संदलेबियाज (Sandalabiyaz)

16) Persian- संदल सुफैद (Sandal suphed)

चंदन के फायदे ( Chandan Benefits and Uses in Hindi )

अन्य पेड़ों की तरह ही चंदन का भी पेड़ होता है। यह सात्विक पेड़ के नाम से भी जाना जाता है। चंदन का वैज्ञानिक नाम संतलम एल्बम है। यह छोटे से मध्यम आकार का वृक्ष है और यह भारत के विभिन्न जगहों पर मिलता है। इसकी लकड़ी का उपयोग मूर्ति, साज-सज्जा की चीजों, हवन करने और अगरबत्ती बनाने के साथ-साथ अन्य कामों में भी उपयोग किया जाता है।

1) मूत्र रोग में चंदन के फायदा ( Benefits of Chandan for urinary disease )

10-20 मिली चावल के धुले हुए पानी में, 2-4 ग्राम बारीक ( Benefits of Sandalwood Powder ) चंदन के चूर्ण, और चीनी को मिला लें। इसे पिएं। इसके साथ ही उबालकर दूध को ठंडा कर लें, और इसके साथ, अन्न का सेवन करें। इससे मूत्र रोग, जैसे- पेशाब का रुक-रुक आने आदि परेशानी में लाभ होता है। पेशाब में जलन की बीमारी से परेशान हैं, तो 50-100 मिली गाय के दूध में 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण को मिला लें। इसे पिने से आराम मिलता है।

2) उल्टी रोकने के लिए ( Benefits of Chandan for vomiting )

आप उल्टी को रोकने के लिए भी चंदन का इस्तेमाल कर सकते हैं। 500 मिग्रा सफेद चंदन को घिस लें। इसे 10 मिली आंवला के रस में घोल लें। इसमें मधु मिलाकर पीने से उल्टी में लाभ होता है। इसी तरह चंदन के 5-10 ग्राम बारीक चूर्ण को, चार गुना आंवला के रस में घोल लें। इसमें मधु मिलाकर पीने से उल्टी रुक जाती है। इसके अलावा 10-30 मिली ( Benefits of Sandalwood Powder ) आंवले के रस में, 1-2 ग्राम चन्दन के पेस्ट को मिला लें। इसका सेवन करने से उल्टी पर रोक लगती है।

3) ल्यूकोरिया को ठीक करने के लिए ( Benefits of Chandan for Leukorrhea )

ल्यूकोरिया महिलाओं को होने वाली बीमारी है। इस बीमारी में महिलाओं के ( Benefits of Sandalwood Powder ) शरीर में इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में सफेद, या लाल चंदन का काढ़ा बना लें। इसे 20-30 मिली मात्रा में पीने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है। 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण को दूध, तथा घी में पका लें। इसे ठंडा करके मधु, और चीनी मिला लें। इसे पीने से ल्यूकोरिया में तुरंत फायदा होता है।

4) कैंसर के लिए ( Benefits of Chandan for Cancer )

इसमें कोई शक नहीं है कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है। ऐसे में इससे बचाव के लिए चंदन उपयोगी हो सकता है। एक स्टडी के अनुसार, चंदन के तेल में एंटी कैंसर गुण पाए जाते हैं। इसके साथ ही चंदन के पेड़ से निकाले जाने वाले यौगिक अल्फा सैंटालोल) में एंटीकैंसर और कीमोप्रिवेंटिव गुण की बात सामने आई है । इसके अलावा, यह नॉन ( Benefits of Sandalwood Powder ) टॉक्सिक भी है, जिस कारण इसका उपयोग सुरक्षित हो सकता है । साथ ही ध्यान रखें कि यह कैंसर से बचाव में कुछ हद तक मददगार हो सकता है, लेकिन यह किसी भी तरीके से कैंसर का इलाज नहीं है। अगर कोई कैंसर से पीड़ित है, तो डॉक्टरी उपचार करवाना अतिआवश्यक है।

5) खुजली को ठीक करने के लिए ( Benefits of Chandan for itching )

चंदन के प्रयोग से आप खुजली की बीमारी ठीक कर सकते हैं। चंदन को जल के साथ घिसकर त्वचा पर लगाएं। इससे खुजली ठीक होती है। चंदन के तेल में नींबू का रस, तथा कपूर मिला लें। इसे लगाने से खुजली ठीक हो जाती है। देखा जाए, तो चंदन त्वचा संबंधी एलर्जी के लिए भी लाभदायक हो सकता है। शोध में जिक्र मिलता है कि यह सोरायसिस (psoriasis – एक प्रकार की त्वचा संबंधी समस्या) और एटॉपिक डर्मेटाइटिस जिसमें ( Benefits of Sandalwood Powder ) लाल खुजलीदार रैशेज हो जाते हैं) के लिए भी लाभकारी हो सकता है। इसके अल्फा सैंटालोल यौगिक में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। हालांकि, इस बारे में अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन त्वचा को आराम देने के लिए चंदन का उपयोग किया जा सकता है।

चंदन का उपयोग

चमकती त्वचा के लिए चंदन का फेसपैक लगा सकते हैं। घाव या चोट पर चंदन का लेप लगा सकते हैं। चंदन के तेल से एरोमाथेरेपी ले सकते हैं। तन की दुर्गंध हटाने के लिए चंदन का पेस्ट या चंदन के तेल को नहाने के पानी में डालकर नहा सकते हैं। मार्केट में कई प्रकार के सैंडलवुड सोप भी उपलब्ध हैं, तो चंदन युक्त साबुन का ( Benefits of Sandalwood Powder ) उपयोग भी कर सकते हैं। चंदन के चूर्ण का सेवन दूध के साथ किया जा सकता है। हालांकि, ध्यान रहे इस बारे में डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी है।

दादी मां के नुस्खों का हिस्सा

चंदन पाउडर और चंदन का तेल केवल आयुर्वेद या चाइनीज मेडिकल ट्रीटमेंट में ही नहीं यूज होता है बल्कि भारत में पीढ़ियों से चंदन का उपयोग सुंदरता और शीतलता के लिए किया जाता है। यही वजह है कि हमारे यहां भगवान का श्रृंगार भी चंदन के बिना अधूरा रहता है। वैसे क्या आपको पता है कि शिवजी को चंदन का टीका क्यों लगाया जाता है? ताकि विष पीने के बाद उनके शरीर ( Benefits of Sandalwood Powder ) में हो रही जलन शांत हो सके। बस समझ जाइए कि स्किन और मन पर कैसे असर करता है चंदन

चंदन का तेल बनाने की विधि

सामग्री:

1) आवश्यकतानुसार चंदन पाउडर (बाजार या ऑनलाइन उपलब्ध)

2) आधे से एक कप या आवश्यकतानुसार वर्जिन ऑलिव ऑयल या सामान्य ऑलिव ऑयल

3) छोटा ग्लास जार या बोतल

बनाने की विधि:

1) एक कप ऑलिव ऑयल में आवश्यकतानुसार चंदन पाउडर डालें।

2) अब इसे ग्लास जार में डालकर अच्छी तरह से हिलाएं ताकि पाउडर अच्छी तरह से घुल जाए।

3) फिर इसे एक हफ्ते किसी साफ और सूखी जगह पर रखें।

4) इसे बीच-बीच में हिलाते रहें।

5) एक हफ्ते बाद तेल के मिश्रण को अच्छी तरह से छान लें।

6) अब इसे दूसरे साफ ग्लास जार में निकालकर किसी ठंडी जगह पर रख दें।

7) फिर जब मन तब उपयोग करें।

Side Effects of Chandan in Hindi

  • अगर किसी को एलर्जी की समस्या है, तो हो सकता है कि चंदन से खुजली, जलन या रैशेज हों।
  • मुंह के द्वारा लेने से यह पेट संबंधी कई समस्याओं का कारण बन सकता है। हालांकि, इस तथ्य से जुड़ा कोई वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।
  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं चंदन के सेवन से बचें।

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