Benefits of cinnamon in Hindi: दालचीनी के फायदे

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Cinnamon In Hindi:- दालचीनी के इस्तेमाल करने से पाचनतंत्र संबंधी विकार, दांत, व सिर दर्द, चर्म रोग, मासिक धर्म से जुडी सभी समस्याओ का निवारण किया जा सकता है। इसके अलावा दस्त, और टीबी की समस्या होने पर दालचीनी का उपयोग किया जाता है। आज हम आपको हमारे इस लेख के माधयम से दालचीनी के फायदे तथा नुकसान आदि पर चर्चा परिचर्चा करेंगे और साथ में यह भी बताएंगे की दालचीनी क्या होती है? और इसका उपयोग कैसे करे ?

Cinnamon in Hindi

Table of Contents

दालचीनी का पौधा दिखने में बहुत छोटा है लेकिन औषधीय गुण उतने ही ज्यादा होते हैं। इसकी सूखी पत्तियां तथा छाल को मसालों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। दालचीनी के पेड़ की छाल थोड़ी मोटी, चिकनी तथा हल्के भूरे रंग की होती है।यह मोटापा कम करने के साथ-साथ कई रोगो को भी दूर करने में सहायक होता है।दालचीनी रक्तशोधक का कार्य भी करता है। शहद और दालचीनी को साथ मिलाकर सेवन करने से दिल की बीमारियों, कोलेस्ट्रॉल, त्वचा रोग, सर्दी जुकाम, पेट की बीमारियों के लिए गुणकारी होता है।

दालचीनी क्या है? (What is Cinnamon in Hindi?)

दालचीनी एक मसाला होता है। दालचीनी की छाल पतली, पीली, और अधिक सुगन्धित होती है। दालचीनी की छाल भूरे रंग तथा मुलायम, और चिकनी होती है।दालचीनी के पौधे के फूल छोटे, हरे या सफेद रंग के होते हैं तथा फलों को तोड़ने पर अंदर से तारपीन जैसी गन्ध आती है। दालचीनी की पत्तियों को मसलने पर इसमें से तीखी गंध आती है। दालचीनी का इस्तेमाल कई प्रकार के गंभीर रोगो को ठीक से छुटकरा पाने के लिए किया जाता है।

Cinnamon in Hindi

Benefits of Cinnamon in Hindi। दालचीनी के फायदे

आंखों के रोग के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi in Eye Disease)

आंखों के ऊपर (पलक पर) दालचीनी का तेल लगाने से आंखों का फड़कने की समस्या को दूर किया जा सकता है, और ऐसा करने सेआंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

दांत के दर्द के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Dental Pain)

  • दालचीनी के तेल को रूई से दांतों में लगाने से दांतो के दर्द से राहत मिलती है।
  • 5-6 दालचीनी के पत्तों को पीसकर मंजन करने से दांत साफ, और चमकीले दिखाई देते है।

सिर दर्द के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Headache)

  •  8-10 दालचीनी के पत्तों को पीसकर लेप बनाकर लेप को सिर पर लगाने से ठंड, या गर्मी से होने वाली सिर दर्द से निजात पाया जा सकता है।
  • सिर में दालचीनी के तेल से मालिश करने से सर्दी के कारण होने वाले सिरदर्द से निजात पाया जा सकता है।

हिचकी की समस्या के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Hiccup)

 दालचीनी के 10-20 मिली काढ़ा का पीने से आप हिचकी की समस्या से निजात पा सकते है।

भूख बढ़ाने के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Appetite )

500 मिग्रा शुंठी चूर्ण, 500 मिग्रा इलायची, तथा 500 मिग्रा दालचीनी को पीस कर सुबह शाम भोजन के साथ सेवन करने से भूख बढ़ती है।

उल्टी को रोकने के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi in Stop Vomiting)

दालचीनी, और लौंग का काढ़ा बना कर 10-20 मिली मात्रा में काढ़े का सेवन करने से उल्टी को रोक जा सकता है।

जुकाम में दालचीनी का इस्तेमाल (Benefits of Cinnamon in Hindi for Common Cold)

दालचीनी को पानी में घिस कर, गर्म करके लेप के रूप में इस्तेमाल करने से जुकाम से राहत मिलती है।

Cinnamon in Hindi

 

खांसी के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Cough Disease)

  • आधा चम्मच दालचीनी के चूर्ण को, 2 चम्मच मधु के साथ सुबह-शाम सेवन करने से खांसी की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
  • दालचीनी के पत्ते का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से खांसी की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • एक चौथाई चम्मच दालचीनी के चूर्ण में 1 चम्मच मधु को मिलाकर दिन में तीन बार इसका उपयोग करने से खांसी, और दस्त से राहत मिलती है।
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कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Cholesterol or Weight Loss)

एक कप पानी में दो चम्मच मधु, तथा तीन चम्मच दालचीनी का चूर्ण (Cinnamon and honey for weight loss) मिलाकर रोज दिन में 3 बार इस्तेमाल करनेसे कोलेस्ट्राल और वजन कम किया जा सकता है।

नाक के रोग के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi to Treat Nasal Disease )

 दालचीनी 3½ ग्राम, लौंग 600 मिग्रा, सोंठ 2 ग्राम को एक लीटर पानी में इन सब को तब तक उबालें जब तक पानी 250 मिली ना रह जा। अब इसको छानकर 50 मिली दिन में 3 बार सेवन करने ने से नाक के रोग को ठीक किया जा सकता है।

पेट फूलने के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Abdominal Problem)

5 ग्राम दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से पेट के फूलने की समस्या को दूर किया जा सकता है।

दस्त के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Diarrhea)

  • 5 ग्राम दालचीनी पाउडर में 1 चम्मच मधु मिलाकर दिन में 3 बार उपयोग करने से दस्त की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
  • 750 मिग्रा दालचीनी के पाउडर में 750 मिग्रा कत्था पाउडर मिलाकर जल के साथ दिन में तीन बार पीने से दस्त की समस्या का निवारण किया जा सकता है।
  • 4 ग्राम दालचीनी, तथा 10 ग्राम कत्था को मिलाकर पीसकर 250 मिली खौलते हुए पानी में डालकर दो घंटे के लिए ढककर रख दे। इसे छानकर दो हिस्से करके सेवन करने से दस्त से राहत मिलती है।
  • बेलगिरी के शर्बत में 2-5 ग्राम दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से दस्त की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
  • दालचीनी की जड़, और छाल का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली की मात्रा में सेवन करने से आमाशय विकार, और दस्त में राहत मिलती है।
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आमाशय विकार के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi for Stomach Problem)

  •  दालचीनी (सिनेमन), इलायची, और तेजपत्ता को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से आमाशय की ऐंठन से राहत मिलती है।
  •  5-10 मिली दालचीनी के तेल का 10 ग्राम मिश्री के साथ सेवन करने से आमाशय में होने वाला दर्द, और उल्टी की समस्या का निवारण है।

आंतों के रोग के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi to Treat Intestine Disorder)

दालचीनी (सिनेमन) का तेल पेट पर मालिश करने से आंतोंकी समस्या को दूर किया जा सकता है।

चर्म रोग के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi in Fighting with Skin Disease)

शहद एवं दालचीनी को मिलाकर रोग वाले अंग पर लगाने से चर्म रोग की समस्याओ का निवारण किया जा सकता है। थोड़े ही दिनों में खुजली-खाज, तथा फोड़े-फुन्सी ठीक हो जायेगे।

दालचीनी के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi in Fever)

1 चम्मच शहद में 5 ग्राम दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम खाने से ठंड के साथ आने वाला संक्रामक बुखार ठीक किया जा सकता है।

बहरेपन की समस्या के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi in Deafness Problem)

दालचीनी के तेल को कान में 2-2 बूंद डालने से बहरेपन की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

रक्तस्राव के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi to Stop Bleeding)

  •  10-20 मिली दालचीनी का काढ़ा सुबह, दोपहर तथा शाम पीने से इस समस्या को ठीक किया जा सकता है।
  • एक चम्मच दालचीनी पाउडर (Dalchini powder) का एक कप पानी के साथ 2-3 बार सेवन करने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

साइनस में दालचीनी से फायदा (Benefits of Cinnamon in Hindi in Sinus Treatment)

 दालचीनी, आक का दूध, तथा दारुहल्दी को पीसकर पेस्ट (बत्ती के जैसा) बनाकर रख दे । साइनस में नाक के भीतर घाव बन जाता है, दालचीनी के पेस्ट को उस घाव पर लगाएं और घाव को भर देने से साइनस की समस्या की ठीक होती है।

Cinnamon in Hindi

टीबी के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi in T.B. Disease Treatment)

दालचीनी के तेल को थोड़ी सी मात्रा में पीने से टीबी के कीटाणु खत्म होते हैं।

गठिया के रोग के लिए (Benefits of Cinnamon in Hindi in Arthritis Treatment)

  • 10-20 ग्राम दालचीनी पाउडर को 20-30 ग्राम मधु में मिलाकर पेस्ट बनाकर दर्द वाले स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करने से जोड़ो के दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • एक कप गुनगुने पानी में 1 चम्मच मधु, एवं दालचीनी का 2 ग्राम पाउडर मिलाकर सुबह, दोपहर, तथा शाम पीने से गठिया के रोग में राहत मिलती है।

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दालचीनी क्या है?

दालचीनी एक मसाला होता है। दालचीनी की छाल पतली, पीली, और अधिक सुगन्धित होती है। दालचीनी की छाल भूरे रंग तथा मुलायम, और चिकनी होती है।दालचीनी के पौधे के फूल छोटे, हरे या सफेद रंग के होते हैं तथा फलों को तोड़ने पर अंदर से तारपीन जैसी गन्ध आती है। दालचीनी की पत्तियों को मसलने पर इसमें से तीखी गंध आती है। दालचीनी का इस्तेमाल कई प्रकार के गंभीर रोगो को ठीक से छुटकरा पाने के लिए किया जाता है।

दांत के दर्द के लिए दालचीनी को कैसे उपयोग में लें?

दालचीनी के तेल को रूई से दांतों में लगाने से दांतो के दर्द से राहत मिलती है।
5-6 दालचीनी के पत्तों को पीसकर मंजन करने से दांत साफ, और चमकीले दिखाई देते है।

बहरेपन की समस्या को दूर करने के लिए दालचीनी कैसे फायदेमंद है?

दालचीनी के तेल को कान में 2-2 बूंद डालने से बहरेपन की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

टीबी के लिए दालचीनी कैसे उपयोगी है?

दालचीनी के तेल को थोड़ी सी मात्रा में पीने से टीबी के कीटाणु खत्म होते हैं।

गठिया के रोग के लिए दालचीनी के उपयोग बताये?

10-20 ग्राम दालचीनी पाउडर को 20-30 ग्राम मधु में मिलाकर पेस्ट बनाकर दर्द वाले स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करने से जोड़ो के दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।
एक कप गुनगुने पानी में 1 चम्मच मधु, एवं दालचीनी का 2 ग्राम पाउडर मिलाकर सुबह, दोपहर, तथा शाम पीने से गठिया के रोग में राहत मिलती है।