18 Giloy Benefits in Hindi: गिलोय के फायदे

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Giloy Benefits

Giloy Benefits:- गिलोय के पत्तों का स्वाद कड़वा तीख़ा तथा कसैला होता है। गिलोय के सेवन करने से वात पित्त और कफ ठीक किया जाता है। यह पचने में आसान होते हैं, इससे हमारे शरीर में भूख भी बढ़ती है। और आंखों के लिए भी गुणकारी होता है। आप गिलोय सेवन कर प्यास, जलन, डायबिटीज, कुष्ट और पीलिया जैसे रोगों से छुटकारा पा सकते हैं । इसके अलावा यह वीर्य और बुद्धि को बढ़ाने में भी सहायक होता है। और बुखार, उल्टी, सुखी खासी, बवासीर, टीबी, मूत्र रोग आदि के इलाज के लिए उपयोगी साबित होता है। महिलाओं में शारीरिक कमजोरी होने पर गिलोय के सेवन से काफी लाभ मिलता है।

Giloy Benefits

Table of Contents

What is Giloy?:- गिलोय लैटिन भाषा में टिनोस्पोरा कॉर्डफॉलिया बोला जाता है। यह मेनिस्परमेसि होता है। गिलोय अमृता अमृतावल्ली अर्थात कभी ना सूखने वाली एक बड़ी बेल होती है।  गिलोय का तना देखने में रस्सी जैसा दिखता है। गिलोय कोमल तने और शाखाओं से जड़े निकलती है। गिलोय के पौधे पर पीले और हरे रंग के फूलों के गुच्छे आते हैं। उसके पते कोमल तथा पाना के आकार में और फल मटर के दाने जैसे दिखाई देते हैं।गिलोय की बेल की जिस पौधे पर चढ़ती है उस पौधे के गुण इसमें भी आ जाते हैं।

गिलोय की बेल यदि नीम के पेड़ पर चढ़े तो यह सबसे अच्छी गिलोय मानी जाती है आधुनिक चिकित्सकों का मानना है की गिलोय में नुकसानदयक बैक्टीरिया तथा पेड़ के कीड़ों को भी खत्म करने  क्षमता होती है । टीबी के वजह से पैदा होने वाले जीवाणुओं की वृद्धि को भी गिलोय रोकती है। इंटेस्टाइन और यूरिन सिस्टम के आलावा पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले रोगाणुओं को भी गिलोय नष्ट करती हैं।

Giloy’s Scientific Names

यह कई प्रजातियों में पाया जाता है। कुछ मुख्यतः निम्न प्रजातियों का प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है।

गिलोय (Tinosporacordifolia (Wild) Miers),Tinosporacrispa (L.) Hook. f. & Thomson  Tinospora sinensis (Lour.) Merr. (Syn- Tinospora malabarica (Lam.) Hook. f. & Thomson)

गिलोय के फायदे । Giloy Benefits in Hindi

आंखों के रोगों के लिए (Giloys Benefits in Treating Eye Problems)

आंखों के रोगों से छुटकारा दिलाने के लिए गिलोय में कई औषधीय गुण लाभदाई होते हैं। आंखों की समस्याओं से निजात पाने के लिए 10 मिलीग्राम गिलोय के रस में 1 ग्राम शहद और 1 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर खूब अच्छी तरह से खरल कर पीस लें। अब इसे आंखों में काजल की तरह लगाएं ।इससे अंधेरा छाना चुंबन और काला या सफेद मोतियाबिंद जैसे रोग ठीक हो जाते हैं।

गिलोय के रस में त्रिफला मिलाकर काढ़ा बनाएं और अब 10 से 20 मिली काले में एक पेपर 1 ग्राम पीपली चूर्ण और शहद मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है ।गिलोय का सेवन करते समय एक बात का ध्यान रखें कि सही मात्रा में और सही तरह से सेवन करें।

कान की बीमारी के लिए (Giloys Benefits in Treating Ear Problems)

सबसे पहले गिलोय के तने को पानी में घिसकर गुनगुना कर ले और इसे कान में दो-दो बूंद दिन में दो बार डालें इससे कान का मैल निकल जाता है ।कान की बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए सही तरह से इस्तेमाल करने से गिलोय का उपयोग करें।

हिचकी रोकने के लिए (Giloy Benefits In Hiccup)

गिलोय और सोंठ के चूर्ण को  नसवार की तरह सूंघने से हिचकी रुक जाती है। गिलोय चूर्ण और सोंठ चूर्ण की चटनी बना कर इसमें दूध मिलाकर पिलाने से हिचकी आना बिल्कुल रुक जाती है ।गिलोय का उपयोग सही मात्रा में करें।

टीबी के रोग के लिए (Giloys Benefits in TB)

टीबी रोग की समस्याओं से निजात दिलानेके लिए गिलोय के औषधीय गुण सहयक होते है। गिलोय को औषधि के रुप मेंपरिवर्तित करने के लिए गिलोय को अश्वगंधा, गिलोय, शतावर, दशमूल, बलामूल, अडूसा, पोहकरमूल तथा अतीस को बराबर भाग में लेकर काढ़ा बनाना होता है।प्रतिदिन 20-30 मिली काढ़ा को सुबह और शाम सेवन करने से टीबी के रोग से छुटकारा पाया जा सकता है। काढ़े के सेवन के समय दूध का सेवन भी करना चाहिए। आप गिलोय के इस काढ़े का इस्तेमाल कर टीबी के रोग से छुटकारा पा सकते है।

उल्टी के लिए (Giloy Benefits in Vomiting)

10 मिली गिलोय के रस में 4-6 ग्राम मिश्री मिलकर सुबह और शाम को पिने से एसिडिटी के कारण होने वाली उलटी से छुटकारा पाया जा सकता है। 125-250 मिली गिलोय की चटनी में 15 से 30 ग्राम शहद मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से उलटी की समस्या का निवारण हो जाता है।

कब्ज के लिए (Giloy Benefits in Constipation)

कब्ज की समस्या से छुटकारा पाने के लिए 10-20 मिली गिलोय के रस के साथ गुड़ का सेवन करे। इसके अलावा आप सोंठ, मोथा, अतीस तथा गिलोय को बराबर भाग में लेकर पानी के साथ काढ़ा बना कर रख ले। रोज सुबह तथा शाम को 20-30 मिली इस काढ़े का सेवन करे। ऐसा करने से आपको कब्ज और अपच जैसी समस्याओ राहत मिलेगी।

बवासीर के लिए (Giloy Uses for Piles Treatment )

आधे लीटर पानी में हरड़, गिलोय तथा धनिया को बराबर मात्रा में लेकर उबाल ले। आपको इसे तब तक उबालना है जब तक है एक चौथाई बाकि न रह जाये। अब आपका काढ़ा तैयार हो जायेगा। सुबह और शाम को इस काढ़े में गुड डालकर पिने से बवासीर की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

पीलिया रोग के लिए ( Benefits of Giloy in Jaundice)

  • पीलिया से राहत दिलाने में गिलोय का लाभ लेने के लिए सही तरह से प्रयोग करना भी ज़रूरी होता है। गिलोय का उपयोग करने के कुछ तरीके :
  • 20-30 मिली गिलोय के काढ़ा में 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार सेवन करने से पीलिया रोग से निजात पाया जा सकता है।
  • 10-20 गिलोय के पत्तों को पीसकर एक गिलास छाछ में मिला ल। अब उसे छानकर सुबह के समय पीने से पीलिया छुटकारा पाया जा सकता है।
  • इसके तने के छोटे-छोटे टुकड़ों की माला बनाकर पहनने से भी आप पीलिया रोग से निजात पाया जा सकता है है।
  • 320 मिली पानी में पुनर्नवा, नीम की छाल, पटोल के पत्ते, सोंठ, कटुकी, गिलोय, दारुहल्दी, हरड़ को 20 ग्राम लेकर पकाकर उसका काढ़ा बना ले ।सुबह और शाम 20 मिली काढ़ा पीने से पीलिया, हर प्रकार की सूजन, पेट के रोग, बगल में दर्द, सांस उखड़ना तथा खून की कमी में आदि समस्याओ से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • गिलोय का पेस्ट 250 ग्राम, गिलोय रस एक लीटर,दूध चार लीटर और घी एक किलो लेकर सबको अचे से घोलकर धीमी आँच पर पका लें। इसे तब तक पकाए जब केवल घी ही बाकि रह जाए। अब इसे छानकर रख लें। अब इस घी को सुबह और शाम 10 ग्राम मात्रा में चार गुना अधिक गाय के दूध में मिलाकर सेवन करे। इसे पीने से खून की कमी, पीलिया एवं हाथीपाँव रोग ठीक होते है।

डायबिटीज के लिए (Uses of Giloy in Control Diabetes)

  1. गिलोय, खस, पठानी लोध्र, अंजन, लाल चन्दन, नागरमोथा, आवँला, हरड़, परवल की पत्ती, नीम की छाल तथा पद्मकाष्ठ सबका बराबर मात्रा में लें।और कूट-पीसकर, छानकर रख लीजिये। अब 10 ग्राम चूर्ण को मधु के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवनकरने से डायबिटीज से निजात पाया जा सकता है।
  2. 10-20 मिली गिलोय के रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन करने से भी डायबिटीज को दूर किया जा सकता है।
  3. गिलोय के 10 मिली रस का सेवन करने से डायबिटीज, वात विकार के कारण होने वाली बुखार तथा टायफायड में गुणकारी होता है।

मूत्र रोग (रुक-रुक कर पेशाब होना) के लिए (Giloy Benefits in Urinary Problems )

10-20 मिली गिलोय के रस में 2 ग्राम पाषाण भेद चूर्ण और 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार सेवन करने से मूत्र रोग या रुक-रुक कर पेशाब होने की बीमारी में राहत मिल सकती है।

गठिया रोग के लिए (Benefits of Giloy in Arthritis Treatment)

5-10 मिली गिलोय के रस या 3-6 ग्राम चूर्ण या 10-20 ग्राम पेस्ट या फिर 20-30 मिली काढ़ा का प्रतिदिन कुछ समय तक इस्तेमाल करने से गठिया रोग में राहत मिल सकती है।गिलोय का सोंठ के साथ सेवन करने से भी जोड़ों का दर्द भी ठीक होता है।

फाइलेरिया (हाथीपाँव) के लिए (Giloy Benefits in Cure Filaria)

30 मिली सरसों के तेल में गिलोय के 10-20 मिली रस को मिलाकर रोज सुबह और शाम खाली पेट पीने से हाथीपाँव या फाइलेरिया रोग से राहत प्राप्त की जा सकती है।

लीवर विकार के (Giloy benefits Helps in Liver Disorder )

18 ग्राम ताजी गिलोय, 2 ग्राम अजमोद, 2 नग छोटी पीपल एवं 2 नग नीम को ले और उसे सेक लें। अब सबको मसलकर रात को 250 मिली पानी में भिगो कर मिट्टी के बरतन में रख दें। इस मिश्रण को सुबह पीसले और छानकर पिला दें। इस तरह आप रोज 15 से 30 दिन तक इस काढ़े का सेवन करे। इससे लीवर व पेट की समस्याएं तथा अपच जैसी समस्या का निवारण हो जायेगा।

एसिडिटी के लिए (Giloy Benefits in Acidity)

10-20 मिली गिलोय के रस के साथ गुड़ और मिश्री के साथ सेवन करने से एसिडिटी को ठीक किया जा सकता है।

20-30 मिली गिलोय के काढ़ा या चटनी में 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से एसिडिटी से छुटकारा मिलता है।

कफ के लिए (Giloy Benefits in Cure Cough)

मधु के साथ गिलोय का सेवन करने से कफ की समस्या से राहत मिलती है है।

स्वस्थ ह्रदय के लिए (Giloy Benefits for Healthy Heart)

गिलोय का काली मिर्च के गुनगुने पानी के साथ पीने से सीने का दर्द ठीक होता है।

कैंसर के लिए (Giloy Benefits in Cancer)

  • ब्लड कैंसर के रोगियों को गेहूँ के ज्वारे के साथ गिलोय का रस मिलाकर सेवन करने कैंसर से निजात पाया जा सकता है।
  • 10 ग्राम गेहूँ की हरी पत्तियां और लगभग 2 फ़ीट लम्बी और एक अगुंली जितनी मोटी गिलोय लें और थोड़ा-सा पानी मिलाकर पीसकर कपड़े से निचोड़ कर 1 कप की मात्रा में खाली पेट सेवन करें।

बुखार के लिए (Giloy Benefits in Fever)

  • 40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह मसलकर मिट्टी के बरतन में 250 मिली पानी मिलाकर रात भर ढककर रखे और सुबह मसल-छानकर 20 मिली की मात्रा दिन में तीन बार सेवन करने से पुराना बुखार छुटकारा पाया जा सकता है।
  • गिलोय के 20 मिली रस में एक ग्राम पिप्पली तथा एक चम्मच मधु मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पुराना बुखार, कफ, तिल्ली बढ़ना, खांसी, अरुचि आदि रोगो से छुटकारा पाया जा सकता हैं।
  • बेल, अरणी, गम्भारी, श्योनाक (सोनापाठा) तथा पाढ़ल की जड़ की छाल, गिलोय, आँवला, धनिया सभी को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाइये। 20-30 मिली काढ़ा को दिन में दो बार पीने से वातज विकार की वजह से होने वाला बुखार की समस्या को दूर किया जा सकता है।

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What is Giloy?

गिलोय लैटिन भाषा में टिनोस्पोरा कॉर्डफॉलिया बोला जाता है। यह मेनिस्परमेसि होता है। गिलोय अमृता अमृतावल्ली अर्थात कभी ना सूखने वाली एक बड़ी बेल होती है।  गिलोय का तना देखने में रस्सी जैसा दिखता है। गिलोय कोमल तने और शाखाओं से जड़े निकलती है। गिलोय के पौधे पर पीले और हरे रंग के फूलों के गुच्छे आते हैं। उसके पते कोमल तथा पाना के आकार में और फल मटर के दाने जैसे दिखाई देते हैं।गिलोय की बेल की जिस पौधे पर चढ़ती है उस पौधे के गुण इसमें भी आ जाते हैं।
गिलोय की बेल यदि नीम के पेड़ पर चढ़े तो यह सबसे अच्छी गिलोय मानी जाती है आधुनिक चिकित्सकों का मानना है की गिलोय में नुकसानदयक बैक्टीरिया तथा पेड़ के कीड़ों को भी खत्म करने  क्षमता होती है । टीबी के वजह से पैदा होने वाले जीवाणुओं की वृद्धि को भी गिलोय रोकती है। इंटेस्टाइन और यूरिन सिस्टम के आलावा पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले रोगाणुओं को भी गिलोय नष्ट करती हैं।

पीलिया रोग के लिए गिलोय के उपयोग बताईये?

पीलिया से राहत दिलाने में गिलोय का लाभ लेने के लिए सही तरह से प्रयोग करना भी ज़रूरी होता है। गिलोय का उपयोग करने के कुछ तरीके :
20-30 मिली गिलोय के काढ़ा में 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार सेवन करने से पीलिया रोग से निजात पाया जा सकता है।
10-20 गिलोय के पत्तों को पीसकर एक गिलास छाछ में मिला ल। अब उसे छानकर सुबह के समय पीने से पीलिया छुटकारा पाया जा सकता है।
इसके तने के छोटे-छोटे टुकड़ों की माला बनाकर पहनने से भी आप पीलिया रोग से निजात पाया जा सकता है है।
320 मिली पानी में पुनर्नवा, नीम की छाल, पटोल के पत्ते, सोंठ, कटुकी, गिलोय, दारुहल्दी, हरड़ को 20 ग्राम लेकर पकाकर उसका काढ़ा बना ले ।सुबह और शाम 20 मिली काढ़ा पीने से पीलिया, हर प्रकार की सूजन, पेट के रोग, बगल में दर्द, सांस उखड़ना तथा खून की कमी में आदि समस्याओ से छुटकारा पाया जा सकता है।
गिलोय का पेस्ट 250 ग्राम, गिलोय रस एक लीटर,दूध चार लीटर और घी एक किलो लेकर सबको अचे से घोलकर धीमी आँच पर पका लें। इसे तब तक पकाए जब केवल घी ही बाकि रह जाए। अब इसे छानकर रख लें। अब इस घी को सुबह और शाम 10 ग्राम मात्रा में चार गुना अधिक गाय के दूध में मिलाकर सेवन करे। इसे पीने से खून की कमी, पीलिया एवं हाथीपाँव रोग ठीक होते है।

गठिया रोग के लिए गिलोय के उपयोग बताईये?

5-10 मिली गिलोय के रस या 3-6 ग्राम चूर्ण या 10-20 ग्राम पेस्ट या फिर 20-30 मिली काढ़ा का प्रतिदिन कुछ समय तक इस्तेमाल करने से गठिया रोग में राहत मिल सकती है।गिलोय का सोंठ के साथ सेवन करने से भी जोड़ों का दर्द भी ठीक होता है।

कैंसर के लिए गिलोय के फायदे बताईये?

ब्लड कैंसर के रोगियों को गेहूँ के ज्वारे के साथ गिलोय का रस मिलाकर सेवन करने कैंसर से निजात पाया जा सकता है।
10 ग्राम गेहूँ की हरी पत्तियां और लगभग 2 फ़ीट लम्बी और एक अगुंली जितनी मोटी गिलोय लें और थोड़ा-सा पानी मिलाकर पीसकर कपड़े से निचोड़ कर 1 कप की मात्रा में खाली पेट सेवन करें।

बुखार के लिए गिलोय को कैसे इस्तेमाल करें?

40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह मसलकर मिट्टी के बरतन में 250 मिली पानी मिलाकर रात भर ढककर रखे और सुबह मसल-छानकर 20 मिली की मात्रा दिन में तीन बार सेवन करने से पुराना बुखार छुटकारा पाया जा सकता है।
गिलोय के 20 मिली रस में एक ग्राम पिप्पली तथा एक चम्मच मधु मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पुराना बुखार, कफ, तिल्ली बढ़ना, खांसी, अरुचि आदि रोगो से छुटकारा पाया जा सकता हैं।
बेल, अरणी, गम्भारी, श्योनाक (सोनापाठा) तथा पाढ़ल की जड़ की छाल, गिलोय, आँवला, धनिया सभी को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाइये। 20-30 मिली काढ़ा को दिन में दो बार पीने से वातज विकार की वजह से होने वाला बुखार की समस्या को दूर किया जा सकता है।

लीवर विकार के लिए फायदे बताईये?

18 ग्राम ताजी गिलोय, 2 ग्राम अजमोद, 2 नग छोटी पीपल एवं 2 नग नीम को ले और उसे सेक लें। अब सबको मसलकर रात को 250 मिली पानी में भिगो कर मिट्टी के बरतन में रख दें। इस मिश्रण को सुबह पीसले और छानकर पिला दें। इस तरह आप रोज 15 से 30 दिन तक इस काढ़े का सेवन करे। इससे लीवर व पेट की समस्याएं तथा अपच जैसी समस्या का निवारण हो जायेगा।