Mustard Seeds in Hindi- Top 16 Surprising Health Benefits, Benefits of Rai seeds

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Benefits of Rai seeds

Mustard seeds in Hindi:- आप सभी ने सरसों से बने व्यंजनों का सेवन तो किया ही होगा, जैसे कि सरसों का साग, सरसों का तेल, सरसों के दानों आदि। सरसों के बीजों से तेल भी निकाला जाता है। जिसे पारंपरिक रूप से भोजन बनाने तथा अन्य कई कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा हमारे देश में कई प्रकार के व्यंजनों में सरसों के बीजों का तड़का भी किया जाता है, जो भोजन का स्वाद बढ़ाने में सहायक होता है।

Mustard seeds in Hindi

Table of Contents

यह हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। और इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। सरसों के दानों को भारत में राई भी कहा जाता है। आज हम आपके साथ हमारे इस लेख के माध्यम से सरसों के दाने से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी जैसे राई के फायदे राई के नुकसान राई के पोषक तत्व राई क्या होती है? आदि पर चर्चा करेंगे।

राई Cruciferae or Brassicaceae परिवार का पौधा है, जो लगभग 1 फुट से लेकर 3 फुट लंबा होता है। राई का वैज्ञानिक नाम Brassica campestris है । सरसों के पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल सब्जी बनाने और फूलों और बीज का इस्तेमाल तेल बनाने तथा सब्जियों में तड़का लगाने के लिए किया जाता है। राई के का इस्तेमाल सब्जी में किया जाता है। सरसों के पौधे में लगभग 25 प्रजातियां पाई जाती है। भारत में सरसों का उत्पादन सर्वाधिक मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, असम, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश राजस्थान, पंजाब में किया जाता है। यह पूरे भारत में उगाई जाती है।

मुख्य रूप से प्रचलित प्रमुख सरसों पीली सरसों(ब्रैसिका हिरता), काली सरसों (ब्रेसिला निग्र) और भूरी सरसों (ब्रैसिका जुनसिया) होते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। सरसों के बीज को अंग्रेजी में मास्टर सीड का जाता है और हिंदी में राई भी कहा जाता है।

इसके अलावा इसे तेलुगु में अवालू कहा जाता है। भारत के प्रत्येक प्रांत में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। सरसों के बीजों का इस्तेमाल मांसपेशियों के दर्द, सोरायसिस, दाद तथा अन्य समस्याओं से राहत पाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इनके कुछ हिस्सों का इस्तेमाल कैंसर डायबिटीज की समस्याओं से इलाज के लिए भी किया जाता है।

Nutrients of Mustard seeds in Hindi

सरसों के बीजो में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम, जिंक, मैंगनीज, कॉपर, सेलेनियम, विटामिन सी, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन बी6 फोलेट, कॉलिन विटामिन ए, बीटा कैरोटीन ,विटामिन ई, विटामिन के, एस्कोरबिक एसिड, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त सरसों के बीजों में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स, anti-inflammatory, एंटीबैक्टीरियल आदि औषधीय गुण मौजूद होते है।

Mustard Seeds In Hindi

Mustard seeds in Hindi

कैंसर के लिए (Mustard oil seeds in Hindi for Cancer)

सरसों की बीजों में Anticarcinogenic औषधीय गुण पाया जाता है, जो कैंसर को पनपने से रोकता है। इसके अतिरिक्त सरसों के तेल में ओमेगा 3 Polyunsaturated Fatty Acids मौजूद होता है, जो कोलन कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक होता है। सरसों के बीजों में एंटी कैंसर औषधीय गुण पाया जाता है, जो कैंसर के विकास को रोकता है। लेकिन यह पूरी तरह से कैंसर का इलाज करने में सक्षम नहीं होता है। इसीलिए कैंसर जैसी गंभीर समस्या होने पर आप डॉक्टर से अपना उचित इलाज जरूर करवाएं।

अस्थमा की समस्या के लिए (Mustard seeds in Hindi for Asthmatic problems)

सरसों के बीजों में साइनपाइन नामक कार्बनिक योगिक पाया जाता है, जो मांसपेशियों की सक्रियता और फेफड़ों की कार्य क्षमता को बढ़ाकर अस्थमा की स्थिति में विपरीत क्रिया उत्पन्न करने में सहायक होता है। यह अस्थमा को रोकने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त सरसों के बीजों में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो अस्थमा समस्या से निजात दिलवाने में सहायक होते हैं। अस्थमा एक गंभीर समस्या होती है, इसीलिए अपना इलाज डॉक्टर से जरूर करवाएं।

माइग्रेन के लिए (Mustard seeds in Hindi for migraine)

सरसों के बीजों में विटामिंस और राइबोफ्लेविन नमक पोषक तत्व पाया जाता है, जो माइग्रेन के खतरे को कम करने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं, जो माइग्रेन के कारण सिर दर्द की समस्या से निजात दिलाने में सहायक होते हैं। माइग्रेन एक गंभीर समस्या होती है, इसीलिए आप बिना देरी के डॉक्टर से इलाज करवाएं।

रक्तचाप के लिए(Mustard seeds in Hindi for blood pressure)

सरसों की बीजों में एंटी हाइपरटेंशन औषधीय गुण पाया जाता है, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है। रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए आप ही का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह आपके स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है।

वजन कम करने के लिए (Mustard seeds in Hindi to reduce weight)

सरसों के दानों में डायसेलिग्लिसरोल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो वजन घटाने में सहायक होता है। राई पाचन प्रक्रिया को संतुलित बनाए रखती है और मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देती है। जिससे वजन नियंत्रित रहता है। मोटापे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए सरसों के बीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं यह आपके स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

कोलेस्ट्रोल के लिए (Mustard seeds in Hindi for cholesterol)

सरसों के बीजों में डाईसेलिग्लिसरोल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सक्षम होता है। इसके अतिरिक्त सरसों के बीजों का सेवन करने से लिपॉप्रोटीन यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में वृद्धि होती है। और लो डेंसिटी लिपॉप्रोटीन यानी कि खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में कमी होती है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए आप राय के बीजों का सेवन कर सकते हैं। या फिर सरसों के तेल से बनी भोजन सामग्री का भी सेवन कर सकते हैं यह आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

मधुमेह के लिए (Mustard seeds in Hindi for diabetes)

सरसों की सरसों में हाइपोग्लाइसेमिक और anti-diabetic औषधीय गुण पाया जाता है, जो हमारे रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करने में सहायता करते हैं। काले सरसों के बीजों में टाइप टू डायबिटीज की समस्या से निजात दिलाने में सहायक होते हैं ।डायबिटीज की समस्या से निजात पाने के लिए आप सरसों का से इस्तेमाल कर सकते हैं । इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप सरसों के बीज या फिर तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

रूमेटाइड अर्थराइटिस के लिए(mustard seeds in Hindi for rheumatoid arthritis)

सरसों के तेल मी ओमेगा 3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, जो रूमेटाइड अर्थराइटिस की समस्या से निजात दिलाने में सहायक होती है। इसके अतिरिक्त सरसों के तेल में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण भी पाया जाता है, जो अर्थराइटिस के कारण होने वाले दर्द और जोड़ों में सूजन को कम करने में सहायक होता है। यह पैरों में गान्ठ की सूजन को भी कम करने में सहायक होता है। हड्डियों से जुड़ी समस्या से निजात पाने के लिए सरसों के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप सरसों के तेल से प्रभावित स्थान पर मालिश कर सकते हैं।

रतौंधी की समस्या के लिए (Mustard seeds in Hindi for night blindness)

यह समस्या विटामिन ए की कमी के कारण होती है जिसकी वजह से हमें रात के समय दिखाई नहीं देता है ।सरसों के बीजों में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो रतौंधी की समस्या को काफी हद तक कम करने में सहायक होता है। रतौंधी की समस्या से निजात पाने के लिए सरसों के बीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन यह एक गंभीर बीमारी बन सकती है। इसीलिए आप डॉक्टर से अपना इलाज भी जरूर करवाएं।

रजोनिवृत्ति के लिए (Mustard seeds in Hindi for menopause)

सरसों में कॉपर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और सेलेनियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह सभी पोषक तत्व रजोनिवृत्ति के कुछ लक्षण या महिलाओं में होने वाली कुछ समस्याएं जैसे उच्च रक्तचाप और ओस्टियोपोरोसिस की समस्याओं से निजात दिलवाने में सहायक होते हैं। रजोनिवृत्ति एक ऐसी होती है, जब महिलाओं में मासिक धर्म स्थाई रूप से बंद हो जाते हैं। इस स्थिति में महिलाएं गर्भवती नहीं होती है और उन्हें कई समस्याएं भी हो सकती है। उन सभी समस्याओं से निजात पाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

पाचन के लिए (Mustard seeds in Hindi for digestion)

सरसों के बीजों में फाइबर तथा अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो कब्ज तथा अन्य पेट की समस्याओं से निजात दिलाने में सहायक होते हैं। यह वजन को नियंत्रित करने में भी सहायक होते हैं। पेट संबंधित समस्याओं से निजात पाने के लिए आप सरसों का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह फाइबर का प्रमुख स्त्रोत होता है। इसमें फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

सर्दी और बुखार के लिए (Mustard seeds in Hindi for fever and cold)

सरसों के तेल में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो सर्दी जुकाम और फ्लू की समस्या से निजात दिलवाने में सहायक होते हैं। यदि पीली बुखार की समस्या होने पर आप मरीज के पैरों को गर्म पानी में सरसों मिलाकर धोने से राहत मिलती है। बुखार तथा अन्य समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सरसों का तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।जुखाम होने पर कुछ बूंदे सरसों के तेल की कुछ बूंदे नासिक द्वार पर लगाने से आपकी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। ऐसा करने पर आपको कुछ समय के लिए जलन महसूस होगी।

पेट दर्द और मांसपेशियों के दर्द के लिए (Mustard seed in Hindi for back pain and muscle pain)

सरसों के बीजे में एंटी इन्फ्लेमेटरी औषधीय गुण पाया जाता है, जो मांसपेशियों को सूजन कर दर्द की समस्या से निजात दिलाने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त इसमें एनाल्जेसिक औषधीय गुण भी पाया जाता है, जो गाठीया की समस्या के कारण होने वाले पेट दर्द और जोड़ों के दर्द से निजात दिलवाने में सहायक होता है। सरसों के तेल को हल्का गर्म करके इस्तेमाल करने से आप गठिया की समस्या से निजात पा सकते हैं।

संक्रमण रोगों से लड़ने के लिए (Mustard seed in Hindi for infectious disease)

सरसों के बीजों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याओं से निजात दिलवाने में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त यह कई संक्रमित रोगों की का इलाज करने में भी सक्षम होता है। आप गर्म पानी में सरसों के बीजों को मिक्स करके उसमें पैर डालकर सकते हैं  इससे होने वाले कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। यह आपके स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

त्वचा के लिए (Mustard seeds in Hindi for skin)

सरसों में विटामिन सी एस्कोरबिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो सौंदर्य उत्पादों की में इस्तेमाल किया जाता है। यह हमारी त्वचा पर एंटी एजिंग प्रभाव दर्शाता है, जो बढ़ती हुई उम्र के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है। सरसों के तेल का इस्तेमाल करने से संबंधित कई समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

बालों के लिए (Mustard oil in Hindi for hair)

सरसों के तेल में विटामिन प्रोटीन और फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, जो बालों के विकास और बाल झड़ने की समस्या को कम करने में सहायक होती है। इसके अतिरिक्त बालों से जुड़ी अन्य समस्याओं से निजात पाने के लिए आप सरसों के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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Black mustard seeds in hindi- Side Effects

▶️ तलने के लिए एक बार इस्तेमाल किए गए सरसों तेल का प्रयोग दोबारा ना करें इससे फेफड़ों के कैंसर का बढ़ने का खतरा हो सकता है।

▶️ अधिक समय तक त्वचा पर सरसों का तेल लगाने से जलन की समस्या सामने आ सकती है।

▶️ विटामिन ई के सप्लीमेंट का अधिक मात्रा में सेवन करने से मस्तिष्क में ज्यादा खून बहने का की समस्या सामने आ सकती है। क्योंकि सरसों के बीजों में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। तो इसे भोजन के माध्यम से इस्तेमाल करना आपके लिए काफी हानिकारक साबित हो सकता है।

▶️ सरसों के तेल में इरूसिक एसिड पाई जाती है, जो लिपोसिस की समस्या का कारण बन सकती है। और हृदय संबंधित समस्याएं भी सामने आ सकती है।

▶️सरसों के तेल का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के बजाय घटा सकती है।

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राइ क्या है?

राई Cruciferae or Brassicaceae परिवार का पौधा है, जो लगभग 1 फुट से लेकर 3 फुट लंबा होता है। राई का वैज्ञानिक नाम Brassica campestris है । सरसों के पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल सब्जी बनाने और फूलों और बीज का इस्तेमाल तेल बनाने तथा सब्जियों में तड़का लगाने के लिए किया जाता है। राई के का इस्तेमाल सब्जी में किया जाता है। सरसों के पौधे में लगभग 25 प्रजातियां पाई जाती है। भारत में सरसों का उत्पादन सर्वाधिक मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, असम, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश राजस्थान, पंजाब में किया जाता है। यह पूरे भारत में उगाई जाती है।

कैंसर के लिए कैसे उपयोगी है राय बताईये?

सरसों की बीजों में Anticarcinogenic औषधीय गुण पाया जाता है, जो कैंसर को पनपने से रोकता है। इसके अतिरिक्त सरसों के तेल में ओमेगा 3 Polyunsaturated Fatty Acids मौजूद होता है, जो कोलन कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक होता है। सरसों के बीजों में एंटी कैंसर औषधीय गुण पाया जाता है, जो कैंसर के विकास को रोकता है। लेकिन यह पूरी तरह से कैंसर का इलाज करने में सक्षम नहीं होता है। इसीलिए कैंसर जैसी गंभीर समस्या होने पर आप डॉक्टर से अपना उचित इलाज जरूर करवाएं।

सर्दी और बुखार को दूर करने के लिए राइ का प्रयोग कैसे करें ?

सरसों के तेल में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो सर्दी जुकाम और फ्लू की समस्या से निजात दिलवाने में सहायक होते हैं। यदि पीली बुखार की समस्या होने पर आप मरीज के पैरों को गर्म पानी में सरसों मिलाकर धोने से राहत मिलती है। बुखार तथा अन्य समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सरसों का तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।जुखाम होने पर कुछ बूंदे सरसों के तेल की कुछ बूंदे नासिक द्वार पर लगाने से आपकी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। ऐसा करने पर आपको कुछ समय के लिए जलन महसूस होगी।

पेट दर्द और मांसपेशियों के दर्द के लिएसरसो के बीज का उपयोग कैसे करें?

सरसों के बीजे में एंटी इन्फ्लेमेटरी औषधीय गुण पाया जाता है, जो मांसपेशियों को सूजन कर दर्द की समस्या से निजात दिलाने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त इसमें एनाल्जेसिक औषधीय गुण भी पाया जाता है, जो गाठीया की समस्या के कारण होने वाले पेट दर्द और जोड़ों के दर्द से निजात दिलवाने में सहायक होता है। सरसों के तेल को हल्का गर्म करके इस्तेमाल करने से आप गठिया की समस्या से निजात पा सकते हैं।

सरसो के बीज के दुष्प्रभाव बताईये?

▶️ तलने के लिए एक बार इस्तेमाल किए गए सरसों तेल का प्रयोग दोबारा ना करें इससे फेफड़ों के कैंसर का बढ़ने का खतरा हो सकता है।
▶️ अधिक समय तक त्वचा पर सरसों का तेल लगाने से जलन की समस्या सामने आ सकती है।
▶️ विटामिन ई के सप्लीमेंट का अधिक मात्रा में सेवन करने से मस्तिष्क में ज्यादा खून बहने का की समस्या सामने आ सकती है। क्योंकि सरसों के बीजों में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। तो इसे भोजन के माध्यम से इस्तेमाल करना आपके लिए काफी हानिकारक साबित हो सकता है।
▶️ सरसों के तेल में इरूसिक एसिड पाई जाती है, जो लिपोसिस की समस्या का कारण बन सकती है। और हृदय संबंधित समस्याएं भी सामने आ सकती है।
▶️सरसों के तेल का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के बजाय घटा सकती है।