Tinda in Hindi- Top 5 Health Benefits of Apple Gourd (टिंडे के फायदे)

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Apple Gourd

Tinda in Hindi:- टिंडा एक ऐसी शाकाहारी सब्जी है, जो पौष्टिकता से भरपूर है। टिंडा को हजम करना आसान होता है। टिंडा में Anti-oxidants, fiber, carotenoids, vitamin C, iron or potassium होता है, जो टिंडे को सूपरफूड बनाने में मदद करता है। टिंडे की सब्जी खाते तो सब लोग है,लेकिन आयुर्वेद में इसका औषधि के रूप में भी उपयोग किया जाता है, टिंडा के फायदे बारे में आपको बहुत कम मालूम होगा | इसलिए आगे हम टिंडा के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। Tinda in Hindi

Tinda in Hindi

भारत में टिंडा पसंद करने वालों की तादाद काफी कम है, जिसके पीछे इसके स्वाद को वजह माना जा सकता है। लेकिन, इस वजह से इससे दूरी बनाना अच्छा विचार नहीं है, क्योंकि पोषण के मामले में यह काफी प्रभावशाली साबित होता है। त्वचा, पाचन तंत्र और बालों के लिए टिंडा के फायदे हो सकते हैं, इसमें Protein, Calcium, Potassium, Vitamin A, Vitamin C, Iron, Manganese आदि उच्च मात्रा में होते हैं। Tinda in Hindi

एप्‍पल गौर्ड को भारतीय शिशु कद्दू या टिंडा भी कहा जाता है। यह भारत में पैदा हुआ है लेकिन दक्षिण एशिया, और अन्‍य गर्म देशों में भी अच्‍छी मात्रा में पाया जाता है। टिंडा के फायदे यह हैं कि यह हमारे लिए शाकाहारी सब्‍जी का अच्‍छा विकल्‍प है जो हमें बहुत से पोषक तत्‍वों की प्राप्ति करने में मदद करता है। यह अपने बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के कारण सुपर फूड माना जाता है। इसमें 94 प्रतिशत पानी होता है और इस सब्‍जी में कैलोरी बहुत ही कम मात्रा में होती है।

टिंडा क्या है

  •  इसकी लताएं हर जगह फैल जाती हैं। टिंडा का तना कोणीय आकार का और रोम वाला होता है। टिंडा के पत्ते ककड़ी के पत्ते जैसे पतले, रोमश और लगभग 6 सेमी लम्बे होते हैं।
  •  टिंडा के फूल छोटे, पीले, 3 सेमी व्यास या डाइमीटर के और गुच्छे में होते हैं। इसके फल अंडा के आकार के, 6-10 सेमी व्यास के, हरे और सफेद रंग के या धब्बेदार पीले रंग के होते हैं। टिंडा के भीतर का भाग मुलायम और रस वाला होता है। बीज संख्या में अनेक, बड़े और अण्डाकार, 8 मिमी लम्बे, पीले सफेद रंग के और चिकने होते हैं।
  • टिंडा त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद होने के साथ-साथ पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा होता है। इसके अलावा टिंडे की सब्जी  कई और रोगों के लिए भी लाभकारी है, जैसे- टिंडा का फल आमाशय रस को बढ़ाने वाला, रक्त को शुद्ध करने, कृमिनाशक, मल-मूत्र को शरीर से निकालने में भी सहायता करता है। इसके अलावा, गले के दर्द को कम करने के साथ-साथ खुजली और शराब पीने शरीर जो अज्ञानता के अवस्था में जाता है उससे बाहर निकालने में सहायता करता है।Tinda in Hindi

 tinda in hindi

अन्य भाषाओं में टिंडा के नाम (Name of Tinda In Different Languages)

Tinda in :

1) Name of Tinda in Sanskrit- डिण्डिश, रोमशफल, मुनिनिर्मित, चित्तगोदुम्बा, तिण्डिश, सुवर्तुला;

2) Name of Tinda in Apple Gourd- ढेंड़स, टिंडा;

3) Name of Tinda in Punjabi – टन्डस (Tandus), टेण्डू (Tendu), टिण्डा (Tinda);

4) Name of Tinda in Marathi – ढेमसे (Dhemase);

5) Name of Tinda in Malayalam – देंडसे (Dhendse), दिंडशी (Dhindshi);

6) Name of Tinda in Rajasthan – टिंडसी (Tindsi);

7) Name of Tinda in Sindh – दिलपसन्द (Dilpasand)।

8) Name of Tinda in English – इण्डियन स्क्वैश (Indian squash), स्क्वैश मैलन (Squash melon), टिण्डा (Tinda)।

टिंडे के फायदे (Benefits of Tinda in Hindi)

1) त्वचा और बालों के लिए ( Benefits of Tinda for Skin )

टिंडे में मौजूद Vitamin E And Antioxidants गुण त्वचा को Moisturize करने का कार्य करते हैं। इसका Gel Extract Sunburn And Rashes को ठीक करने में मदद करता है और त्वचा को मुलायम बनाता है। Tinda in Hindi

टिंडे में Anti-Inflammatory गुण होते हैं, जो त्वचा के संक्रमण को सही करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, इसमें मौजूद Vitamin C त्वचा को शुद्ध और साफ रखता है और उसे एलर्जी से दूर रखता है।

टिंडे का उपयोग बालों के लिए भी फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद विभिन्न विटामिन और मिनरल बालों को जड़ से Moisturize करते हैं और उनकी ग्रोथ को बढ़ाते हैं। इसके जेल Extract को बालों की जड़ों में लगाने से उन्हें स्वस्थ बनाया जाता है और बालों की मोटाई को बरकरार रखा जाता है।

टिंडा खाने के अलावा बालों या सिर की त्वचा में लगाने से डैंड्रफ की समस्या को भी कम किया जाता है। इसके गूदे से निकला जेल डैंड्रफ बनाने वाले धूल और Fungus Particles को दूर करने में मदद करता है और आपको डैंड्रफ से होने वाली खुजली आदि से राहत देता है।

2) मधुमेह के लिए (Benefits of Tinda for Diabetes)

अध्‍ययनों से पता चलता है कि टिंडें में कैलोरी की मात्रा कम होती है और आहार फाइबर अच्‍छी मात्रा में होते हैं। इस कारण टिंडा मधुमेंह वाले लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होता है, क्‍योंकि यह शर्करा के अवशोषण को नियंत्रित करता है और उसके स्‍तर को कम करने में मदद करता है। टिंडे के छिल्‍कों में Photochemical होते हैं जो रक्‍त शर्करा को कम करने में मदद करते हैं। इसलिए ताजा और छिल्‍के सहित टिंडों का सेवन करना मधुमेह के लिए फायदेमंद होता है। Tinda in Hindi

3) दिल की बीमारी के लिए (Benefits of Tinda for Heart)

एंटीऑक्‍सीडेंट की अच्‍छी मात्रा होने के कारण टिंडा फल के फायदे Coronary heart disease जैसी किसी भी बीमारी से हृदय की रक्षा करने में हमारी मदद करते हैं। टिंडे में वसा की मात्रा कम होती है और फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं जो रक्‍तचाप को नियंत्रित करने और दिल को स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने में मदद करते हैं। यह आंत में कोलेस्‍ट्रॉल अवशोषण को भी कम करता है। कोलेस्‍ट्रॉल कई हृदय रोगों का मुख्‍य कारण होता है। Tinda in Hindi

4) खून को साफ करने के लिए (Benefits of Tinda for Clean the blood)

खून साफ न होने पर कई तरह के त्वचा संबंधी रोग होने की संभावना होती है। टिण्डे के फल के रस का सेवन करने से रक्त का शोधन तथा मुँह और गला सूख जाने के एहसास से छुटकारा मिलता है। टिंडा के फायदे खून को साफ कर उससे संबंधित बीमारियों से राहत दिलाने में मदद करती है।

5) पथरी के लिए (Benefits of Tinda for Clean Stones)

आजकल पैकेज्ड फूड और मसालेदार खाना खाने से पथरी होना आम बात हो गया है। आयुर्वेद के अनुसार इस अवस्था से बाहर आने में टिंडा मदद करता है। टिंडा के ताजे कोमल फलों को कुचलकर, पीसकर रस निकाल लें। 10-15 मिली रस में 65-125 मिग्रा यवक्षार मिलाकर गुनगुना करके पिलाने से पथरी टूट-टूट कर निकल जाती है। इसके साथ-साथ टिंडे का रस पित्तज-विकारों को कम करने के अलावा मूत्र और लीवर संबंधी रोगों में लाभकारी होता है। Tinda in Hindi

टिंडा का इस्तेमाल कैसे करें :

बीमारी के लिए टिंडे के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए टिंडा का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

1) –5-10 मिली टिंडे के जड़ का रस

2) –10-15 मिली टिंडा के पत्तों का रस

टिंडा की सब्जी बनाने की विधि

Side Effects of Apple Gourd in Hindi

टिंडा का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह आपके पेट की परेशानियों जैसे दस्‍त (Diarrhea) या पेट की ऐंठन को बढ़ा सकता है, क्‍योंकि इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है।

गर्भवती (Pregnant) और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को टिंडे का सेवन करने से पहले अपने डाक्‍टर से सलाह लेना फायदेमंद होता है। Tinda in Hindi 

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टिंडा क्या है?

इसकी लताएं हर जगह फैल जाती हैं। टिंडा का तना कोणीय आकार का और रोम वाला होता है। टिंडा के पत्ते ककड़ी के पत्ते जैसे पतले, रोमश और लगभग 6 सेमी लम्बे होते हैं।
 टिंडा के फूल छोटे, पीले, 3 सेमी व्यास या डाइमीटर के और गुच्छे में होते हैं। इसके फल अंडा के आकार के, 6-10 सेमी व्यास के, हरे और सफेद रंग के या धब्बेदार पीले रंग के होते हैं। टिंडा के भीतर का भाग मुलायम और रस वाला होता है। बीज संख्या में अनेक, बड़े और अण्डाकार, 8 मिमी लम्बे, पीले सफेद रंग के और चिकने होते हैं।
टिंडा त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद होने के साथ-साथ पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा होता है। इसके अलावा टिंडे की सब्जी  कई और रोगों के लिए भी लाभकारी है, जैसे- टिंडा का फल आमाशय रस को बढ़ाने वाला, रक्त को शुद्ध करने, कृमिनाशक, मल-मूत्र को शरीर से निकालने में भी सहायता करता है। इसके अलावा, गले के दर्द को कम करने के साथ-साथ खुजली और शराब पीने शरीर जो अज्ञानता के अवस्था में जाता है उससे बाहर निकालने में सहायता करता है।

त्वचा और बालों के लिए टिंडे के फायदे बताईये?

टिंडे में मौजूद Vitamin E And Antioxidants गुण त्वचा को Moisturize करने का कार्य करते हैं। इसका Gel Extract Sunburn And Rashes को ठीक करने में मदद करता है और त्वचा को मुलायम बनाता है। Tinda in Hindi

दिल की बीमारी के लिए इलाज के लिए टिंडे के फायदे?

एंटीऑक्‍सीडेंट की अच्‍छी मात्रा होने के कारण टिंडा फल के फायदे Coronary heart disease जैसी किसी भी बीमारी से हृदय की रक्षा करने में हमारी मदद करते हैं। टिंडे में वसा की मात्रा कम होती है और फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं जो रक्‍तचाप को नियंत्रित करने और दिल को स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने में मदद करते हैं। यह आंत में कोलेस्‍ट्रॉल अवशोषण को भी कम करता है। कोलेस्‍ट्रॉल कई हृदय रोगों का मुख्‍य कारण होता है। Tinda in Hindi

टिंडा का इस्तेमाल कैसे करें ?

बीमारी के लिए टिंडे के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए टिंडा का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।
–5-10 मिली टिंडे के जड़ का रस
–10-15 मिली टिंडा के पत्तों का रस