Tulsi juice Benefits of Hindi ( तुलसी जूस के ये 8 चमत्कारी फायदे )

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Tulsi juice Benefits of Hindi

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जिस घर के आंगन में तुलसी का पौधा होता है, वहां बैक्टीरिया और जीवाणु प्रवेश नहीं कर पाते हैं। साथ ही घर का वातावरण भी शुद्ध होता है। इस कारण दादी के नुस्खे  के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि तुलसी के फायदे क्या होते हैं। साथ ही तुलसी के उपयोग के सही तरीके के बारे में भी आप इस लेख में जानेंगे, ताकि आप तुलसी के नुकसान से बच सकें। तो आइए,अब विस्तार से तुलसी के फायदे और नुकसान के बारे में समझें।

वैदिक काल से भारत में तुलसी के पौधे का प्रयोग किया जा रहा है और हिंदू धर्म में इसे काफी पवित्र माना गया है। प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद करता है. गिलोय और तुलसी दोनों आयुर्वेद की दुनिया में लोकप्रिय जड़ी बूटियां हैं, क्योंकि ये आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने और हानिकारक रोगाणुओं से शरीर की सुरक्षा को मजबूत करने के अपने गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं. गिलोय तुलसी जूस का नियमित सेवन करने से आपका इम्यूनिटी स्तर बढ़ सकता है और आपको भीतर से स्वस्थ और मजबूत रख सकता है.

Tulsi juice Benefits of Hindi

यह हर्बल टॉनिक आम सर्दी और खांसी और फ्लू के लक्षणों से लड़ने के लिए आपके शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाती है. तुलसी के पौधे का आकार और रंग भौगोलिक स्थिति, बारिश और पौधे के प्रकार पर निर्भर करता है। तुलसी का इस्‍तेमाल भोजन से लेकर दवाओं तक में किया जाता है। सलाद और चटनी में तुलसी की खुशबू और तीखा स्‍वाद मन को भा जाता है। प्राचीन समय में तुलसी को शुद्धता का प्रतीक माना जाता था।

हमारे ऋषियों को लाखों वर्ष पूर्व तुलसी के औषधीय गुणों का ज्ञान था इसलिए इसको दैनिक जीवन में प्रयोग हेतु इतनी प्रमुखत से स्थान दिया गया है। आयुर्वेद में भी तुलसी के फायदों का विस्तृत उल्लेख मिलता है। इस लेख में हम आपको तुलसी के फायदे, औषधीय गुणों और उपयोग के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि तुलसी के पौधे के पास जाने और इसे सूंघने से कई तरह के संक्रमण से बचाव होता है।

Tulsi juice Benefits of Hindi

आज हम आपको यहां बता रहे हैं कि तुलसी के क्या-क्या लाभ हैं और इसका इस्तेमाल कहां-कहां किया जाता है? दरअसल, इस समय पूरी दुनिया में कोरोनावायरस फैला हुआ है तो उसको देखते हुए सभी लोग अपने-अपने स्तर पर इससे बचनेे के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेकिन मेडिकल साइंस की मानें तो अगर किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होगी, तो उसे किसी भी वायरस से लड़ने में मदद मिलेगी।

तुलसी के बीजों में फ्लैवोनोइड्स और फेनोलिक शामिल होते हैं जो कि मानव के शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारते हैं। तुलसी एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है जो कि शरीर में फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाती है। अगर आप इसकी पत्तियां चबाते हैं या फिर इससे हर्बल-टी बनाकर पीते हैं तो उससे शरीर को लाभ होता है। अगर किसी भी इंसान का इम्युनिटी सिस्टम स्ट्रॉन्ग है तो उसे बीमारियां कम लगती हैं और वह उनका मुकाबला कर लेता है।

तुलसी क्या है? (What is Tulsi in Hindi)

तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसमें विटामिन (Vitamin) और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। सभी रोगों को दूर करने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाले गुणों से भरपूर इस औषधीय पौधे को प्रत्यक्ष देवी कहा गया है क्योंकि इससे ज्यादा उपयोगी औषधि मनुष्य जाति के लिए दूसरी कोई नहीं है। तुलसी के धार्मिक-महत्व के कारण हर-घर आगंन में इसके पौधे लगाए जाते हैं। तुलसी की कई प्रजातियां मिलती हैं। जिनमें श्वेत व कृष्ण प्रमुख हैं। इन्हें राम तुलसी और कृष्ण तुलसी भी कहा जाता है।

Tulsi juice Benefits of Hindi

अन्य भाषाओं में तुलसी के नाम (Name of Tulsi in Different Languages)

Tulsi in:

  • Tamil – तुलशी (Tulashi)
  • Telugu – गग्गेर चेट्टु (Gagger chettu)
  • Sanskrit : तुलसी, सुरसा, देवदुन्दुभि, अपेतराक्षसी, सुलभा, बहुमञ्जरी, गौरी, भूतघ्नी
  • Hindi : तुलसी, वृन्दा
  • Odia : तुलसी (Tulasi)
  • Kannad : एरेड तुलसी (Ared tulsi)
  • Gujrati : तुलसी (Tulasi)
  • Bengali : तुलसी (Tulasi)
  • Nepali : तुलसी (Tulasi)
  • Marathi : तुलस (Tulas)
  • Malyalam : कृष्णतुलसी (Krishantulasi)
  • Arabi : दोहश (Dohsh)

तुलसी के फायदे एवं उपयोग (Tulsi Benefits and Uses in Hindi)

1) तुलसी के रस का फायदा आँखों के लिए – Tulsi for eyes in Hindi

सौ ग्राम ताज़ा तुलसी की पत्तियाँ विटामिन ए की दैनिक उचित खुराक देती हैं। विटामिन ए में एंटीऑक्सीडेंट गुण हैं और वह स्वस्थ दृष्टि (आँखों) के लिए आवश्यक है। ताज़ा तुलसी का रस (अर्क) आँखों की सूजन और रतौंधी के लिए अच्छा है जो आमतौर पर विटामिन ए की कमी के कारण होता है। आँखों की सूजन के लिए, प्रतिदिन बिस्तर पर जाने से पहले प्रभावित आंख में काली तुलसी के रस की दो बूँदें डाल लें। तुलसी अर्क बनाने की विधि बहुत ही आसान है। कुछ तुलसी की पत्तियों को गरम पानी में डालें और उसे पाँच से दस मिनट के लिए ढक दें, फिर उसे छान लें।

2) तुलसी की चाय है सिर दर्द का इलाज – Tulsi for headache in Hindi

तुलसी सिर दर्द के लिए एक अच्छी दवा है क्योंकि यह मांसपेशियों को आराम देती है। तुलसी और चंदन के पेस्ट को माथे पर लगाने से तुरंत तनाव और तंग मांसपेशियों की वजह से हो रहे दर्द से राहत मिलती है। वैकल्पिक रूप से, एक दिन में दो बार तुलसी की चाय पी सकते हैं। तुलसी की चाय बनाने के लिए, एक कप उबलते पानी में कुछ ताज़ा तुलसी के पत्ते डाल दें और कुछ मिनट के लिए रहने दें। फिर चाय छान लें। चाय आराम से पिएं और आपके सिर का दर्द धीरे-धीरे गायब हो जाएगा। हल्के सिर दर्द के लिए, आप कुछ ताज़ा तुलसी के पत्तों को चबा लें या शुद्ध तुलसी के तेल के साथ अपने सिर की मालिश करें।

3) तुलसी के औषधीय गुण पेट दर्द के लिए – Tulsi for stomach ache in Hindi

तुलसी आपके पाचन तंत्र के लिए भी अच्छी है। आप इसकी पत्तियों से तुलसी का रस निकालकर पेट में दर्द या ऐंठन के इलाज के लिए प्रयोग कर सकते हैं। तुलसी के रस की एक चम्मच, अदरक के रस की समान राशि के साथ मिलाकर तुरंत पेट दर्द को कम करने के लिए इस्तेमाल करें। इसके अलाबा अन्य आम पेट सम्बंधित समस्याओं जैसे कब्ज, अपच, बवासीर, अम्लता या मासिक धर्म/माहवारी की पीड़ा को कम करने के लिए आप तुलसी की चाय भी पी सकते हैं।

4) कान के दर्द और सूजन में लाभदायक – Benefits of Tulsi Leaves for Ear Pain in Hindi

तुलसी की पत्तियां कान के दर्द और सूजन से आराम दिलाने में भी असरदार है। अगर कान में दर्द है तो तुलसी-पत्र-स्वरस को गर्म करके 2-2 बूँद कान में डालें। इससे कान दर्द से जल्दी आराम मिलता है। इसी तरह अगर कान के पीछे वाले हिस्से में सूजन (कर्णमूलशोथ) है तो इससे आराम पाने के लिए तुलसी के पत्ते तथा एरंड की कोंपलों को पीसकर उसमें थोड़ा नमक मिलाकर गुनगुना करके लेप लगाएं। कान दर्द से राहत दिलाने में भी तुलसी के पत्ते खाने से फायदा मिलता है।

5) गले से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद -Benefits for Throat Infection in Hindi

सर्दी-जुकाम होने पर या मौसम में बदलाव होने पर अक्सर गले में खराश या गला बैठ जाने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। तुलसी की पत्तियां गले से जुड़े विकारों को दूर करने में बहुत ही लाभप्रद हैं। गले की समस्याओं से आराम पाने के लिए तुलसी के रस को हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर उससे कुल्ला करें। इसके अलावा तुलसी रस-युक्त जल में हल्दी और सेंधानमक मिलाकर कुल्ला करने से भी मुख, दांत तथा गले के सब विकार दूर होते हैं।

6) खांसी से आराम – Tulsi Benefits for Cough in Hindi

तुलसी की पत्तियों से बने शर्बत को आधी से डेढ़ चम्मच की मात्रा में बच्चों को तथा 2 से चार चम्मच तक बड़ों को सेवन कराने से, खांसी, श्वास, कुक्कुर खांसी और गले की खराश में लाभ होता है। इस शर्बत में गर्म पानी मिलाकर लेने से जुकाम तथा दमा में बहुत लाभ होता है। इस शरबत को बनाने के लिए कास-श्वास-तुलसी-पत्र (मंजरी सहित) 50 ग्राम, अदरक 25 ग्राम तथा कालीमिर्च 15 ग्राम को 500 मिली जल में मिलाकर काढ़ा बनाएं, चौथाई शेष रहने पर छानकर तथा 10 ग्राम छोटी इलायची बीजों के महीन चूर्ण मिलाकर 200 ग्राम चीनी डालकर पकाएं, एक तार की चाशनी हो जाने पर छानकर रख लें और इसका सेवन करें।

7) रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार – Improve Immunity Power in Hindi

तुलसी के नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। 20 ग्राम तुलसी बीज चूर्ण में 40 ग्राम मिश्री मिलाकर पीस कर रख लें। सर्दियों में इस मिश्रण की 1 ग्राम मात्रा का कुछ दिन सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वात एवं कफ से जुड़े रोगों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा 5-10 मिली कृष्ण तुलसी-पत्र स्वरस में दोगुनी मात्रा में गाय का गुनगुना घी मिलाकर सेवन करने से भी वात और कफ से जुड़े रोगों से आराम मिलता है।

8) दाद और खुजली में तुलसी के अर्क के फायदे – Tulsi Ark Beneficial in Ringworm in Hindi

दाद और खुजली में तुलसी का अर्क अपने रोपण गुण के कारण लाभदायक होता है | यह दाद में होने वाली खुजली को कम करता है, और साथ ही उसके घाव को जल्दी भरने में मदद करता है | यदि तुलसी के अर्क का सेवन किया जाए तो यह रक्त शोधक (रक्त को शुद्ध करने वाला) होने के कारण अशुद्ध रक्त का शोधन अर्थात रक्त को साफ़ करता है और त्वचा संबंधित परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है|

तुलसी का उपयोग – How to Use Basil in Hindi

तुलसी खाने के फायदे उठाने के लिए रोज सुबह खाली पेट तुलसी की पत्तियों को चबाया जा सकता है। उससे पहले इसे पानी से जरूर धो लें। तुलसी के पत्तों के साथ अदरक व शहद का इस्तेमाल करके हर्बल चाय बनाई जा सकती है।

यह चाय न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि स्वाद में भी अच्छी होती है। आप अपनी पसंदीदा डिश जैसे टमाटर की चटनी, फ्लेवर दही, मीट की ग्रेवी में तुलसी के पत्तों को काटकर डाल सकते हैं।

इससे डिश का स्वाद भी बढ़ेगा और जरूरी पोषक तत्व भी मिलेंगे। खाना बनाते समय अंत में तुलसी के पत्तों को मिक्स कर देने से इससे खाने में अनोखा स्वाद आएगा और साथ ही खाने से मनमोहक खुशबू भी आएगी।

जूस या मॉकटेल में भी तुलसी के पत्तों को डाल सकते हैं। इससे नया फ्लेवर मिलेगा। सलाद में भी तुलसी के ताजे पत्तों को काटकर मिक्स कर सकते हैं।

तुलसी को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें

सबसे पहले तुलसी के पत्तों को डंठल के करीब से तोड़ लें। अब उन्हें अच्छी तरह धो कर, साफ कपड़े से पोंछ लें। इसके बाद एक-एक पत्ते को अलग करके, एक माइक्रोवेव सेफ प्लेट पर रखकर माइक्रोवेव में रख दें।

अब माइक्रोवेव को 30 सेकंड के लिए दो बार चलाएं। याद रखें कि एक बार में पूरे एक मिनट का टाइम सेट न करें। इसके बाद पत्तियों को बाहर निकाल कर चूर लें और और छोटी हवाबंद शीशी में इस पाउडर को रख दें। इसका उपयोग आप लगभग एक महीने तक कर सकते हैं।

तुलसी के नुकसान – Side Effects of Basil in Hindi

इसमें एंटीफर्टिलिटी प्रभाव होते हैं, जिसके कारण इसका अधिक उपयोग पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होने का कारण बन सकता है। इस बात पर अभी कोई पुख्ता शोध उपलब्ध नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि यह गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित है। इस वजह से, इस दौरान तुलसी के नुकसान से बचने के लिए इसका सेवन करने से बचना चाहिए । जैसा कि हमने ऊपर बताया कि तुलसी रक्त के थक्के बनने से रोक सकती है। इस कारण अधिक सेवन से यह खून को जरूर से ज्यादा पतला कर सकती है, जिससे रक्तस्राव की समस्या हो सकती है । जो लोग मधुमेह की दवा ले रहे हैं, उन्हें भी तुलसी नहीं खानी चाहिए। इससे रक्त शर्करा का स्तर जरूरत से ज्यादा कम हो सकता है ।

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तुलसी पीने से क्या फायदा होता है?

अगर आप रोज सुबह तुलसी के पत्ते का सेवन करें तो मुंह के बैक्टीरिया खत्म हो जाएंगे जिससे बदबू की समस्या दूर हो जाती है. वजन कम करने में मददगार- तुलसी पाचन में मदद करती है और आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी बाहर निकालती है, इसलिए यह आपको अधिक तेज़ी से वजन कम करने में मदद कर सकती है.

तुलसी के पत्ते कैसे खाये?

तुलसी के पत्तों में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक प्रॉपर्टीज शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। रात को तुलसी के पत्ते गलाकर रख दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।

तुलसी अर्क कैसे पिए?

तुलसी अर्क के एक बून्द एक ग्लास पानी में या दो बून्द एक लीटर पानी में डाल कर पांच मिनट के बाद उस जल को पीना चाहिए। इससे पेयजल विष और रोगाणुओं से मुक्त होकर स्वास्थवर्धक पेय हो जाता है।

तुलसी के पत्ते खाने से क्या नुकसान होता है?

तुलसी के पत्तों में पारा और आयरन की मात्रा पाई जाती है. इसमें कुछ मात्रा में आर्सेनिक भी पाया जाता है, जिससे दांत खराब हो सकते हैं. इससे दांतों में दर्द की समस्या हो सकती है. खून को करता है पतला- तुलसी के पत्तों को ज्यादा खाने से शरीर में खून पतला होता है.

तुलसी का दाना खाने से क्या होता है?

अगर आप एसिडिटी या पेट फूलने जैसी समस्या से परेशान रहते हैं तो आपको तुलसी के बीजों का सेवन पानी या दूध के साथ कर सकते हैं. ऐसा करने से पाचन में मदद मिल सकती है. इससे आपका पेट भी साफ रख सकता है. इनमें फाइबर होने की वजह से यह पाचन के लिए असरदार हो सकते हैं.

तुलसी के पत्तों का सेवन कैसे करना चाहिए?

ब्लड शुगर के नियंत्रण में भी तुलसी के पत्ते की चाय अहम भूमिका निभाता है। तुलसी के पत्तों को बिना चबाए सीधे निगला भी जा सकता है। इसे पानी के साथ निगलकर या फिर इसका काढ़ा बनाकर (तुलसी को दूध या पानी में उबालना नहीं चाहिएतुलसी को उबले पानी में ढककर इस्तेमाल में लेना चाहिए।)

अमरूद के पत्ते कितने दिन खाने चाहिए?

दर्द से तेजी से राहत पाने के लिए एक कप उबलते पानी में अमरूद की जड़ और पत्तियां मिला लें, फिर इसके पानी को छानकर खाली पेट पी लें. एक अध्ययन में साबित हुआ है कि अमरूद की पत्ती वाली चाय पीने से आठ सप्ताह में कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी आ सकती है.

तुलसी के पत्ते के क्या क्या फायदे?

तुलसी के कुछ अनदेखे फायदे इस प्रकार हैं:
यौन रोगों के इलाज में पुरुषों में शारीरिक कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. …
अनियमित पीरियड्स की समस्या में …
सर्दी में खास …
दस्त होने पर …
सांस की दुर्गंध दूर करने के लिए …
चोट लग जाने पर …
चेहरे की चमक के लिए …
कैंसर के इलाज में

तुलसी अर्क कब पीना चाहिए?

घर में तुलसी का पौधा लगाने से मलेरिया वाले मच्छर दूर रहते हैं। इसके अलावा अगर मलेरिया से छुटकारा पाने के लिए दिन में तीन बार तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बनाकर पिएं।

तुलसी की तासीर क्या होती है?

तुलसी की तासीर गर्म होती है, इस वजह से इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में तीव्र जलन की समस्या हो सकती है।

क्या तुलसी को चबाना नहीं चाहिए?

तुलसी की पत्तियों में काफी मात्रा में लौह तत्व व पारा पाया जाता है, जो हमारे दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए आयुर्वेद में तुलसी को चबाने से मना किया गया है। इसके अलावा तुलसी के पत्ते में कुछ मात्रा में आर्सेनिक भी पाया जाता है, जो दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है।

तुलसी के बीजों का उपयोग कैसे करें?

तुलसी के बीजों को रात भर 1 कप पानी में भिगोकर रख दें और सुबह उठकर खा लें। साथ में वह पानी भी पी लें जिसमें इन बीजों को भिगोया गया। बेसिल सीड्स यानी तुलसी के बीजों को आप किसी डिश में भी डालकर खा सकती हैं। इसके अलावा ड्रिंक्स और स्वीट डिशेज में भी इन्हें डालकर खाया जा सकता है।

औरत को तुलसी का दाना खिलाने से क्या होता है?

तुलसी के बीज का नियमित इस्तेमाल करने से यौन-दुर्बलता और नपुंसकता को भी दूर किया जा सकता है। अक्सर महिलाओं को पीरियड्स में अनियमितता की शिकायत हो जाती है। ऐसे में तुलसी के बीज का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।

क्या तुलसी गर्म होती है?

इसके साथ ही तुलसी की तासीर भी गर्म होती है. इससे पेट में जलन की समस्या होती है. एसिडिटी की समस्या- तुलसी की गर्म तासीर के चलते इससे एसिडिटी की समस्या होती है. जरूरत से ज्यादा इसके सेवन से पेट में जलन , दर्द की समस्या हो सकती है.

तुलसी कौन सी अच्छी होती है?

सेहत के लिहाज से श्यामा तुलसी यानी कि कुछ कालापन रंग लिए हुए वाली तुलसी को ज्यादा बेहतर माना जाता है. वहीं रामा तुलसी जोकि एकदम कंचन हरी दिखाई देती है का इस्तेमाल मसालेदार और कड़वी, गर्म, सौम्य, पाचन, पसीना और बच्चों की सर्दी-खांसी की बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है.

घर में कौन सी तुलसी लगानी चाहिए?

तुलसी के पौधे को पश्चिम दिशा की तरफ भी रखा जा सकता है. ध्यान देने वाली बात ये है कि दक्षिण-पश्चिम में और दक्षिण में हमेशा श्यामा तुलसी रखी जाती है.

तुलसी का पौधा सूख जाए तो क्या करें?

यहां आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि तुलसी का सूखा या मुरझाया हुआ पौधा घर में रखना अशुभ माना जाता है. इसलिए तुलसी के सूखे हुए पौधे को किसी नदी में प्रवाहित कर दें और नया पौधा लगा लें.

तुलसी को चबाकर क्यों नहीं खाना चाहिए?

बहुत से लोग तुलसी के पत्ते को चबाकर खाते हैं, ऐसी गलती आप मत कीजिएगा क्योंकि तुलसी के पत्ते में मर्करी पाया जाता है. ये हमारे दांतों की सेहत के लिए सही नहीं माना जाता. यदि नियमित तौर पर तुलसी के पत्तों को चबाया जाए तो ये दांतों को कमजोर बना देता है और खराब कर देता है.

तुलसी में कौन कौन से तत्व पाए जाते हैं?

तुलसी में कई ऐसे औषधीय गुण और पोषक तत्व पाएं जाते हैं जो आपके शरीर को कई प्रकार के बीमारियों से बचाता है। इसमें मौजूद आयरन, फाइबर, विटामिन ए, विटामिन डी, एंटीबैक्टीरियल गुण आपकी इम्युनिटी बढ़ाकर आपको संक्रमण से बचाकर रखता है। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ये सभी पोषक तत्व बहुत महत्वपूर्ण होता है।

तुलसी का पौधा घर में लगाने से क्या लाभ होता है?

तुलसी माता की पूजन से महालक्ष्मी प्रसन्न होती है। घर में तुलसी के पौधे की रोज पूजन से घर के वास्तु दोषों और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। परिवार की आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार आता है। घर में व्याप्त नाकारात्मक ऊर्जा भी खत्म हो जाती है।

क्या रविवार को तुलसी में दीपक जलाना चाहिए?

रविवार के दिन तुलसी के पौधे में दीपक नहीं जलाना चाहिए. -भगवान गणेश, मां दुर्गा और भगवान शिव को तुलसी न चढ़ाएं. -आप कभी भी तुलसी का पौधा लगा सकते हैं लेकिन कार्तिक माह में तुलसी लगाना सबसे उत्तम होता है. –तुलसी की पत्तियों को सदैव सुबह के समय तोड़ना चाहिए.

तुलसी के पत्ते का रस पीने से क्या होता है?

अगर आप रोज सुबह तुलसी के पत्ते का सेवन करें तो मुंह के बैक्टीरिया खत्म हो जाएंगे जिससे बदबू की समस्या दूर हो जाती है. वजन कम करने में मददगार- तुलसी पाचन में मदद करती है और आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी बाहर निकालती है, इसलिए यह आपको अधिक तेज़ी से वजन कम करने में मदद कर सकती है.

तुलसी का दाना खाने से क्या होता है?

अगर आप एसिडिटी या पेट फूलने जैसी समस्या से परेशान रहते हैं तो आपको तुलसी के बीजों का सेवन पानी या दूध के साथ कर सकते हैं. ऐसा करने से पाचन में मदद मिल सकती है. इससे आपका पेट भी साफ रख सकता है. इनमें फाइबर होने की वजह से यह पाचन के लिए असरदार हो सकते हैं.