Uses Of Isabgol- Top 5 Healthy Benefits of Isabgol in Hindi

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uses of isabgol

Uses Of Isabgol:- आजकल की जीवनशैली में तमाम तरह की स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलें आती हैं। खराब खानपान, देर से सोना और देर से जागने की आदत, दिन भर एक ही जगह बैठकर घंटों कंप्यूटर के सामने काम करना ये सब आदतें आपकी सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। इस सब गलत आदतों का पाचन तंत्र पर बहुत बुरा असर पड़ता है और कब्ज़ समेत कई अन्य तरह की ( Uses Of Isabgol ) समस्याएं होने लगती है। अपने देश में कब्ज़ से पीड़ित मरीजों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है और यही कारण है कि लोग कब कब्ज़ से आराम पाने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

Uses Of Isabgol

डॉक्टरों और कई आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसबगोल कब्ज़ से आराम दिलाने की सबसे उपयोगी घरेलू उपचार है। इस लेख में हम आपको इसबगोल के फायदे , नुकसान और खुराक आदि के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। आइये जानते हैं आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में सदियों से इसबगोल का इस्तेमाल हो रहा है।

आज की भागती ( Uses Of Isabgol ) दौड़ती जिंदगी में सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है कब्ज की और कब्ज का रामबाण इलाज है इसबगोल क्योंकि इसमें 70% घुलनशील और 30% अघुलनशील फाइबर होता है। और भी कई फायदे हैं इसबगोल की भूसी- नाम तो सुना होगा।

घर के बुजुर्गों को जब कब्ज की दिक्कत हो जाती है या पेट में किसी तरह की समस्या होती है तो आपने अक्सर उन्हें सफेद रंग की इसबगोल खाते देखा होगा। सदियों से आयुर्वेदिक दवाएं बनाने में भी इसबगोल का इस्तेमाल हो रहा है।

भरपूर मात्रा में फाइबर होने के कारण इसबगोल को कब्ज से राहत दिलाने के ( Uses Of Isabgol ) लिए जाना जाता है। लेकिन इसबगोल के कई और फायदे भी हैं जिन्हें जाकर आप भी इसे जरूर खाना चाहेंगे। ईसबगोल झाड़ीनुमा पौधा है, जिसके फूलों के बीजों से यह भूसी नुमा पाउडर जिसे ईसबगोल कहते हैं, तैयार किया जाता है। इससे अतिसार, कब्ज, जैसी कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

यह एक बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है। इतना ही नहीं, यह वजन भी कम करने के काम आता है। आप इसबगोल के बारे में जरूर जानते होंगे। प्रायः इसबगोल की भूसी का इस्तेमाल कब्ज की समस्या को ठीक करने के लिए किया जाता है।

आमतौर पर लोगों को केवल इतना ही पता होता है, लेकिन सच यह है कि इसबगोल की भूसी के साथ-साथ इसके तने, पत्ते, फूल, जड़ और बीज भी बहुत ही उपयोगी होती हैं। आप इसबगोल का प्रयोग कर अनेक प्रकार की बीमारियों को ठीक कर सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इसबगोल के प्रयोग से शरीर स्वस्थ बनता है। पेचिश तथा दस्त में ( Uses Of Isabgol ) यह उपयोगी होता है। इसके बीज पेशाब बढ़ाने वाले, सूजन को ठीक करने होते हैं। 

इसके साथ ही आप बीज का उपयोग कर कफ की समस्या और वीर्य विकार को ठीक कर सकते हैं। इसकी भूसी मल को हल्का बनाने का काम करती है। यह जलन, पेशाब की समस्याओं, आमाशय के सूजन, दर्द, सूखी खांसी, त्वचारोग, गठिया, सूजाक, घाव, बवासीर, आदि को भी ठीक करती है। वैज्ञानिकों ने भी इस पर कई शोध करके इसबगोल के औषधीय गुण ( Uses Of Isabgol )और पोषक तत्वों के बारे में पता किया है।

इन्हीं रिसर्च के आधार पर हम वैज्ञानिकों ने भी इस पर कई शोध करके इसबगोल के औषधीय गुण और पोषक तत्वों के बारे में पता किया है। इन्हीं रिसर्च के आधार पर हम दादी के नुस्खे के इस लेख में इसबगोल के फायदे और नुकसान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं। के इस लेख में इसबगोल के फायदे और नुकसान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं।

इसबगोल क्या है

इसबगोल के बीजों का आकार घोड़े के कान जैसा होने से इसे इस्पगोल, इसबगोल कहा जाने लगा। इसका उल्लेख प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में मिलता है। 10वीं शताब्दी के पहले से अरबी हकीमों द्वारा दवा के रूप में इसबगोल का प्रयोग किया जाता था। मुगलों के शासनकाल में भी इसबगोल का इस्तेमाल होता था। आयुर्वेद के अनुसार ( uses of isabgol ) ईसबगोल की तासीर शीत मानी गयी है। आज भी पुराने दस्त या पेचिश और आंत के मरोड़ों पर इसका अत्यधिक प्रयोग किया जाता है।

यह आंतों के सूजन और जलन संबंधी परेशानियों का ठीक करता है। औषधि रूप में इसके बीज और बीजों की भूसी का प्रयोग होता है। इसबगोल एक झाड़ीनुमा पौधा है, जो कुछ-कुछ गेहूं के पौधे की तरह दिखता है। इसका वैज्ञानिक नाम प्लांटागो ओवाटा है।

इसके सिरों में गेहूं जैसी बालियां लगती हैं। इसके बीजों के ऊपर सफेद भूसी होती है, जिसे इसबगोल भूसी कहते हैं। स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं के लिए इस ( Uses Of Isabgol ) इसबगोल की भूसी से लेकर इसकी पत्तियों और फूलों का इस्तेमाल किया जाता है।

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यह दो प्रकार का होता है:

1) इसबगोल

2) जंगली इसबगोल

पेट के लिए वरदान

पेट से जुड़ी बीमारियों को ठीक करने में यह बेहद कारगर साबित होता है। आंत में दर्द या जलन से परेशान हैं तो ठंडे पानी के साथ इसबगोल का सेवन करने से राहत मिलती है। अगर आपका बच्चा डायरिया से पीड़ित है तो उसके लिए इसबगोल का सेवन लाभदायी होता है। इसबगोल के दाने को भून कर उसका सेवन करने से ( Uses Of Isabgol ) डायरिया में तुरन्त राहत मिलती है।

अपच, डायरिया और दस्त से परेशान हैं तो दही में दो चम्मच इसबगोल की भूसी डालकर दिन भर में दो-तीन बार इसका सेवन करें, तुरंत राहत मिलेगी। डायरिया, पेचिश और पेट की ऐंठन को खत्म करने के लिए एक गिलास ताजे पानी में इसबगोल और चीनी मिलाकर लें, आराम मिलेगा। एक या दो चम्मच इसबगोल की भूसी को दूध में मिलाकर रात में पीने से कब्ज से राहत मिलती है।

अनेक भाषाओं में इसबगोल के नाम ( Name of Isabgol in Different Languages )

Isabgol in –

1) Hindi– इसबगोल, इश्बगुल, इशबघोल

2) Tamil (Psyllium Husk or Isabgol in tamil)– इशकोल विटाइ (Ishakol vitai)

3) Telugu (psyllium husk in telugu)– इसपगोल विट्टुलु (Isapagola vittulu)

4) Kannada (Isabgol in Kannada)– इसबगोलु (Isabagolu)

5) अंग्रेजी – साइलियम (Psyllium), ब्लौन्ड साइलियम (Blondpsyllium), इसबगोल (Isabgol) स्पोजेल सीड्स (Spogel seeds),

6) Sanskrit – अश्वगोलम्, ईषद्गोलम्, शीतबीजम्, स्निग्धबीजम्, श्लक्ष्णजीरकम्, स्निग्धजीरकम्

7) Urdu – इसपघुल (Ispaghul) Oriya– इसबगुल (Isabgul), बरतंग (Bartang)

8) Gujarati – उमतो (Umto), उर्थामुजीरम् (Urthamujirum), घोड़ा जीरू (Ghora jeeru) , इसप्पुकोल (Ishappukol) , ईसपगला (Isapgala), इस्फघुला (Isphagula)

9) Bengali– इशॉपगोल (Eshopgol)

10) Marathi– इसबगोल (Isabgola)

11) Malayalam– इस्फघल (Ispaghal)

12) Arabic – बज्रेक्वाटुना (Bazrequatuna), बाजरेकतिमा (Bazrekatima), ईसपघोल (Ispaghol), ईसपारजाह (Isparjah)

13) Persian – इस्पोघुल (Ispoghul), अस्पगोल (Aspagol), ईस्परजाह (Isparzah)

इसबगोल के फायदे– Benefits of Psyllium Husk (Isabgol) in Hindi

1) पेचिश के लिए (Benefits of Psyllium Husk for Dysentery )

दो चम्मच इसबगोल की भूसी को दही के साथ दिन में 2–3 बार सेवन करने से पुराने पेचिश तथा खूनी पेचिश में लाभ होता है। इसबगोल के बीजों को भूनकर सेवन करने से भी पेचिश ठीक होता है। इसबगोल के बीजों को एक लीटर पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाए तो तीन खुराक बनाकर दिन में तीन बार देने ( uses of isabgol ) से हर प्रकार की पेचिश, पेट में मरोड़ की परेशानी, अतिसार इत्यादि में लाभ होता है।

100 ग्राम इसबगोल की भूसी में 50-50 ग्राम सौंफ और मिश्री मिलाकर, 2-3 चम्मच की मात्रा में दिन में 2-3 बार सेवन करने से अमीबिक पेचिश में लाभ होता है। इसबगोल के बीजों को पानी में डालकर गाढ़ा काढ़ा बना लें। इसमें चीनी डालकर पीने से अमीबिक पेचिश, साधारण और गंभीर दस्त, पेट के दर्द की परेशानी से आराम मिलता है।

बालकों को बार-बार होने वाले दस्त में इसबगोल का प्रयोग बहुत लाभदायक होता है। इसबगोल के साबुत बीजों को या 10 ग्राम इसबगोल भूसी को ठंडे जल के साथ सेवन करें, या फिर उनको थोड़े ( uses of isabgol ) जल में भिगोकर फूल जाने पर सेवन करें। इससे आंतों का दर्द तथा सूजन ठीक होता है।

2) कब्ज की समस्या के लिए ( Benefits of Psyllium Husk for Constipation )

पेट से जुड़ी तमाम दिक्कतें सिर्फ कब्ज़ की समस्या के कारण ही होती हैं। इसलिए ज़रुरी है कि सबसे पहले कब्ज़ का इलाज किया जाए जिससे बाकि समस्याएं अपने आप ठीक हो जाती हैं। ईसबगोल में मौजूद फाइबर की अधिक मात्रा लैक्सेटिव की तरह काम करती है। इसबगोल की पानी के साथ मिलाकर खाने के एक घंटे बाद लें और इसके ( uses of isabgol ) बाद एक या दो गिलास पानी और पी लें।

यह आंतों की मांसपेशियों की गतिशीलता बढ़ाती है और मल को मुलायम बनाती है जिससे मलत्याग करना काफी आसान हो जाता है। इसबगोल का सेवन कुछ ही दिन करने से कब्ज़ ठीक हो जाता है।

3) वजन कम करने के लिए ( Benefits of Psyllium Husk for Lose weight )

मोटापे से आज के समय में हर तीसरा आदमी परेशान है और वो मोटापे से निजात पाने के हर तरीके आजमा रहा है। जबकि कुछ आयुर्वेदिक तरीके ऐसे हैं जिनकी मदद से वजन कम करना बहुत आसान है। कई मामलों में पेट ठीक से साफ़ ना होने की वजह से भी वजन बढ़ने लगता है। ऐसे में इसबगोल का सेवन करने से पेट अच्छे तरीके से साफ़ होता है और ( uses of isabgol )वजन कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा ईसबगोल खाने से देर तह पेट भरा हुआ महसूस होता है जिससे आप बेवजह कुछ खाने से बच जाते हैं।

4) डायरिया के लिए ( Benefits of Psyllium Husk for Diarrhea )

कब्ज़ दूर करने एक अलावा इसबगोल डायरिया या दस्त रोकने में भी बहुत कारगर है। अधिकांश डॉक्टर डायरिया के घरेलू उपाय के रुप में ईसबगोल खाने की सलाह देते हैं। डायरिया होने पर इसबगोल को दही के साथ मिलाकर खाएं। दही में प्रोबायोटिक गुण होने के कारण यह संक्रमण को जल्दी( uses of isabgol ) ठीक करती है वहीं इसबगोल दस्त को रोकती है।

डायरिया की स्थिति में भी इसबगोल खाने के फायदे होते हैं। दरअसल, इसबगोल खाने से शरीर में फाइबर की पूर्ति होगी, जिससे डायरिया होने का खतरा कई गुना तक कम होता है। इसबगोल के फायदे में कोलन (पेट) की सफाई को भी गिना जाता है। हम ऊफर बता ही चुके हैं कि इसबगोल से आंत में पानी की मात्रा बढ़ती है.

5) आंतों की सुरक्षा के लिए( Benefits of Psyllium Husk for Intestinal )

आंतों को स्वस्थ रखने के लिए भी इसबगोल खाने के फायदे देखे जा सकते हैं। विशेषज्ञों के द्वारा किए गए एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, इसबगोल का सेवन करने से आंत में पानी की मात्रा बढ़ती है, जिससे शौच में आसानी होती है।

साथ ही इससे आंत का कार्य सामान्य रूप से चलता रहता है। इसके अलावा, उत्सर्जन प्रणाली शरीर से गंदगी बाहर निकालने की एक( Uses Of Isabgol ) प्रक्रिया) को बेहतर रखने के लिए भी इसबगोल की भूसी फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद फाइबर गैस्ट्रिक एसिड स्राव को कम करके पाचन तंत्र की रक्षा करता है। रिसर्च में कहा गया है कि इसका सही मात्रा में सेवन किया जाए, तो यह गैस्ट्रिक की समस्या और अल्सर के जोखिम को कम करता है।

इसबगोल सेवन करने का सही तरीका

1) इसबगोल को पानी में भिगोकर ले सकते हैं।

2) दूध में मिलाकर भी इसबगोल का सेवन किया जाता है।

3) त्रिफला पाउडर के साथ भी इसबगोल को मिलाकर खा सकते हैं।

4) इसबगोल को दही के साथ भी खाया जाता है।

कब खाएं– इसबगोल का सेवन सुबह और रात में खाना खाने के बाद कर सकते हैं। हालांकि, गर्भावस्था में इसका सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

कितना खाएं– इसबगोल की एक दिन में 5-10 ग्राम मात्रा का सेवन किया जा सकता है। रिसर्च के ( Uses Of Isabgol) अनुसार, कोलेस्ट्रॉल से परेशान लोगों को रोजाना 5.1 ग्राम इसबगोल देने से फायदा होता है । यह मात्रा व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकती है, इसलिए इसका सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Side Effects of Isabgol in Hindi

इसबगोल में फाइबर होता है। इसका अधिक सेवन करने से पेट फूलने, सूजन और पेट में ऐंठन की समस्या भी हो सकती है ।

डॉक्टरों का कहना है कि किसी को निगलने में कठिनाई या आंतों की समस्या है, तो उसे इसबगोल का सेवन नहीं करना चाहिए।

मधुमेह रोगी को इसबगोल का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इससे ब्लड शुगर लेवल कम होने का जोखिम हो सकता है।

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इसबगोल क्या है?

इसबगोल के बीजों का आकार घोड़े के कान जैसा होने से इसे इस्पगोल, इसबगोल कहा जाने लगा। इसका उल्लेख प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में मिलता है। 10वीं शताब्दी के पहले से अरबी हकीमों द्वारा दवा के रूप में इसबगोल का प्रयोग किया जाता था। मुगलों के शासनकाल में भी इसबगोल का इस्तेमाल होता था। आयुर्वेद के अनुसार ( Uses Of Isabgol ) ईसबगोल की तासीर शीत मानी गयी है। आज भी पुराने दस्त या पेचिश और आंत के मरोड़ों पर इसका अत्यधिक प्रयोग किया जाता है।

यह कितने प्रकार के होते है ?

इसबगोल
जंगली इसबगोल

इसबगोल सेवन करने का सही तरीका बताईये?

इसबगोल को पानी में भिगोकर ले सकते हैं।
दूध में मिलाकर भी इसबगोल का सेवन किया जाता है।
त्रिफला पाउडर के साथ भी इसबगोल को मिलाकर खा सकते हैं।
इसबगोल को दही के साथ भी खाया जाता है।

वजन कम करने के लिए कैसे फायदेमंद होगा?

मोटापे से आज के समय में हर तीसरा आदमी परेशान है और वो मोटापे से निजात पाने के हर तरीके आजमा रहा है। जबकि कुछ आयुर्वेदिक तरीके ऐसे हैं जिनकी मदद से वजन कम करना बहुत आसान है। कई मामलों में पेट ठीक से साफ़ ना होने की वजह से भी वजन बढ़ने लगता है। ऐसे में इसबगोल का सेवन करने से पेट अच्छे तरीके से साफ़ होता है और ( uses of isabgol )वजन कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा ईसबगोल खाने से देर तह पेट भरा हुआ महसूस होता है जिससे आप बेवजह कुछ खाने से बच जाते हैं।